Arrogance Story: घने वन के बीच एक कुटिया में एक जिज्ञासु राजा पहुंचा। उसके मन में एक प्रश्न बार-बार उठता था- क्यों कुछ धर्मपरायण और तपस्वी लोग भी अचानक पतन का शिकार हो जाते हैं? उसने यह प्रश्न वहां के एक ज्ञानी योगी के सामने रखा। योगी ने शांत स्वर में कहा, ‘राजन, पतन का सबसे बड़ा कारण अहंकार होता है। जब मनुष्य अपने तप, ज्ञान और पुण्य पर गर्व करने लगता है, तभी उसके भीतर विनाश के बीज अंकुरित हो जाते हैं।’ राजा ने आश्चर्य से पूछा, ‘क्या केवल अहंकार ही इतना शक्तिशाली है?’ योगी मुस्कुराए और एक कथा सुनाई कि एक तपस्वी था, जिसने वर्षों तक कठोर साधना की। उसके तप से लोग प्रभावित होते थे, पर धीरे-धीरे उसके मन में यह भावना आने लगी कि वह सबसे श्रेष्ठ है। एक दिन एक साधारण भक्त उसके पास आया। Arrogance Story
तपस्वी ने उसे तुच्छ समझकर उसका अपमान कर दिया। उस क्षण उसके वर्षों के तप का प्रभाव क्षीण हो गया। उसका मन अशांत हो गया और उसे अपने भीतर खालीपन का अनुभव होने लगा। तब उसे समझ आया कि उसका अहंकार ही उसके पतन का कारण बना। योगी ने राजा से कहा, ‘‘भक्त वही है, जो स्वयं को छोटा मानता है और हर उपलब्धि को प्रभु की कृपा समझता है। जो मनुष्य धन, ज्ञान या शक्ति का गर्व करता है, वह धीरे-धीरे अपने ही मार्ग से भटक जाता है।’’ राजा की आँखों में समझ का प्रकाश भर गया। उसने विनम्रता को जीवन का आधार बनाने का संकल्प लिया। वास्तव में, जीवन में ऊँचाई पाने का मार्ग अहंकार से नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवा और सच्ची श्रद्धा से होकर जाता है। Arrogance Story















