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Wednesday, April 8, 2026
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    शहर की सड़कों पर ‘मौत का कहर’ ओवरलोड रेत-बजरी वाहन बन रहे यमदूत, प्रशासन बेखबर

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    Pratap Nagar News: शहर की सड़कों पर ‘मौत का कहर’ ओवरलोड रेत-बजरी वाहन बन रहे यमदूत, प्रशासन बेखबर

    प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: यमुनानगर जिले में ओवरलोड रेत-बजरी से भरे तेज रफ्तार वाहन आम लोगों के लिए मौत का पर्याय बन चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में सैकड़ों लोगों की जान लेने वाले ये वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन और आरटीओ की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात यह हैं कि हर दिन औसतन दो हादसे सामने आ रहे हैं और आधे से ज्यादा मामलों में लोगों की मौके पर ही मौत हो जाती है।

    जिले की सड़कों पर इन दिनों ओवरलोड खनन सामग्री से भरे ट्रक और डंपर खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे हैं। ये वाहन न केवल यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि आम राहगीरों के लिए काल बनते जा रहे हैं। Pratap Nagar News

    पिछले तीन सालों में इन ओवरलोड वाहनों की वजह से सैकड़ों जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन इन पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद न तो कोई ठोस कार्रवाई होती है और न ही नियमित जांच अभियान चलाए जाते हैं। इससे वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं और वे बेखौफ होकर सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं।

    हर दिन दो हादसे, आधे मामलों में मौत | Pratap Nagar News

    जानकारी के अनुसार जिले में औसतन रोजाना दो सड़क हादसे ओवरलोड वाहनों के कारण हो रहे हैं। इनमें से करीब 50 प्रतिशत मामलों में राहगीरों की मौत हो जाती है। सबसे ज्यादा शिकार साइकिल सवार, पैदल चलने वाले और बाइक चालक बन रहे हैं, जो इन भारी वाहनों के सामने खुद को असहाय पाते हैं।

    सुबह स्कूल टाइम में बढ़ता खतरा

    चौंकाने वाली बात यह है कि सुबह के समय, जब स्कूल बसें और बच्चे सड़कों पर होते हैं, उसी दौरान सबसे ज्यादा ओवरलोड वाहन तेज रफ्तार में दौड़ते नजर आते हैं। इससे स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अभिभावकों में इसको लेकर भारी डर और आक्रोश है।

    चेकिंग से बचने की होड़ में तेज रफ्तार

    खनन सामग्री से भरे ये वाहन अक्सर बिना बिल और कागजात के चलते हैं। चेकिंग टीम से बचने के लिए चालक तेज रफ्तार में गंतव्य तक पहुंचने की होड़ में रहते हैं, जिससे हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। सबसे अधिक हिमाचल से ओवरलोड वाहन खनन सामग्री से भरे आते हैं। इसके साथ ही भूड कला और शहजादपुर नाके से भी ओवरलोड वाहन खनन सामग्री लेकर निकल रहे हैं। प्रशासन द्वारा देर सवेर ओवरलोड वाहनों को पकड़ कर उनपे होने वाली कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि प्रशाशन द्वारा लगाए गए नाकों से भी ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से गुजर रहे हैं।

    सूत्रों का कहना है कि कई बार ये वाहन निर्धारित क्षमता से कई गुना ज्यादा लोड लेकर चलते हैं, जिससे ब्रेकिंग सिस्टम भी फेल हो जाता है और वाहन अनियंत्रित होकर हादसे का कारण बनते हैं। Pratap Nagar News

    प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

    जिले के लोगों का कहना है कि आरटीओ विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में गहरी नींद में सोया हुआ है। न तो ओवरलोड वाहनों की सख्ती से जांच हो रही है और न ही कोई ठोस रणनीति बनाई जा रही है।

    लोगों का आरोप है कि अगर प्रशासन चाहे तो इन वाहनों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकती है, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी साफ नजर आ रही है।

    लोगों की मांग समयबद्ध रोक और सख्त कार्रवाई

    स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि खनन सामग्री से भरे वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। उनका कहना है कि सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक ऐसे वाहनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए और केवल रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच ही इन्हें चलने की अनुमति दी जाए।

    इसके साथ ही ओवरलोडिंग करने वाले वाहन मालिकों और चालकों पर सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई जा रही है।

    दहशत में जी रहा आम आदमी ओवरलोड वाहनों के आतंक से जिले में आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। लोग अब सड़कों पर निकलने से भी डरने लगे हैं। Pratap Nagar News

    अगर समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही और भी कई जिंदगियां लील सकती है।

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