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    मुख्यमंत्री के गांव का एशियाई स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी लगाता है चाय की स्टॉल

    Inderjeet

    2017 में चैंपियन चीन के खिलाड़ी को पछाड़कर जीता था स्वर्ण पदक 

    (Gold medalist Inderjeet)

    भटिंडा (सुखजीत मान)। ‘तंदरुस्त पंजाब-स्वस्थ पंजाब’ का गुणगान करने वाली पंजाब सरकार के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का शोषण हो रहा है। वे रोजगार के लिए भटक रहे हैं। कोई धान की फसल लगा रहा है तो कोई चाय की स्टॉल। प्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति यह है कि उच्च शिक्षा प्राप्त शिक्षक सड़कों पर धक्के खा रहे हैं, उन्हें पुलिस की लाठियां पड़ रही है। विडंबना यहां तक है कि कई बेरोजगार तो गैंगस्टर तक भी बन गए। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के पैतृक गांव फूल महराज का जंमपल एशियाई स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी (Inderjeet) दो वक्त की रोटी को मोहताज है। अब वह चाय का स्टॉल लगाता है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की यह दुर्दशा प्रदेश की खेल नीति पर सवाल खड़े करती है।

    सच कहूँ से विशेष बातचीत करते हुए पॉवर लिफ्टर इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि उसने वर्ष 2018 में उदयपुर (राजस्थान) में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। उसे वर्ष 2017 के चीन के स्वर्ण पदक विजेता को मात दी थी। जब वह स्वर्ण पदक लेकर पंजाब वापिस लौटा तो अधिकारियों ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया। पंजाब पुलिस के बैंड की धुनें सुनकर उसे लगा कि अब तो बल्ले-बल्ले हो जाएगी। नौकरी मिल जाएगी और जीवन खुशहाल हो जाएगा लेकिन यह सब उसके लिए सपना बन गया। आज भी उसकी किस्मत नहीं बदली।

    घर के गहने तक को रखा गिरवी

    सितम्बर 2018 में वह विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए दक्षिणी अफ्रीका गया था। एशियाई स्तर के मुकाबलों के लिए उसने 70 हजार रुपए और विश्व चैंपियनशिप के लिए एक लाख 30 हजार रुपए एंट्री भरी थी। भावुक हुआ यह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बताता है कि खेल करियर प्रभावित न हो इसीलिए उसने अपने घर को गहने रखकर भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की फीस तक भरीं, लेकिन सरकारों ने उन्हें पूरी तरह से अनदेखा कर दिया।

    कांगड़ भी भरोसे तक सीमित

    इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि नौकरी के लिए उसने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह को मिलने की कई बार कोशिश की लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल सका। वे अपने हलके के विधायक और राजस्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ को कई बार मिलकर समस्याएं बता चुके हैं। कांगड़ ने उन्हें भरोसा जरूर दिया है लेकिन भरोसा तो भरोसा ही होता है। भावुक होते इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि उसके पास करीब 10-11 लड़के अभ्यास करने के लिए आते थे, अब केवल एक ही लड़का आता है। अन्य लड़कों को उनके मां-बाप ने यह कहकर हटा लिया कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद वह खुद ही नहीं कुछ कर सका, उनके बच्चों को भला क्या सिखाएगा।

    मुख्यमंत्री को इन्द्रजीत सिंह की अपील:

    पॉवर लिफ्टर इन्द्रजीत सिंह ने मुख्य मंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह से अपील करते हूए कहा कि मैं आपके गांव का लड़का हूँ, आप मेरी वित्तीय मदद करो। मैं यह नहीं कहता कि मुझे कोई बड़े पद पर नौकरी दो, लेकिन मुझे मेरा बनता अधिकार तो दें।

    खिलाड़ी पुरुस्कार राशि और नौकरी के लिए अप्लाई करे, जरूर मिलेगी: डायरेक्टर

    खेल विभाग के डायरेक्टर डीपीएस खरबंदा का कहना है कि खेल नीति के अंतर्गत सरकार पदक विजेता खिलाड़ियों को पुरुस्कार राशि देती है और इस खिलाड़ी को भी पुरुस्कार राशि के लिए अप्लाई कर देना चाहिए। उसके सर्टीफिकेट की जांच के बाद पुरुस्कार राशि दे दी जाएगी। नौकरी संबंधी पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नौकरियों के लिए खिलाड़ियों को तीन प्रतिशत आरक्षित कोटा रखा गया है और एशियाई खिलाड़ी को तो ग्रेड-ए मिलना है। खिलाड़ी किसी भी विभाग में ग्रेड-ए की नौकरी आने पर अप्लाई कर दे और उसको ग्रेडेशन सर्टिफिकेट वह आप जारी कर देंगे।

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