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Thursday, February 19, 2026
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    चिकित्सकों पर हमले निंदनीय

    Assam Doctor Assaulted

    गत दिवस इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और अन्य संगठनों के आह्वान पर देश के हजारों चिकित्सकों ने कोरोना काल में चिकित्सकों पर हुए हमलों के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। चिकित्सकों ने मांग रखी कि कानून के तहत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। देशभर में कोरोना संक्रमण के खिलाफ चिकित्सक व सहायक स्टॉफ डटा हुआ है, हालांकि उन्हें कोरोना योद्धा का भी नाम दिया है। महामारी के शुरूआती दौर से लेकर अब तक 700 से अधिक चिकित्सकों की कोरोना ड्यूटी दौरान मौत हुई। इसके अलावा गांवों से लेकर महानगरों तक कोरोना वॉरियर्स के साथ बदसलूकी की खबरें भी आती रहीं। चिकित्सकों और उनके परिवारों ने देश के लिए बड़ी कुर्बानी दी। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग ने लाखों की संख्या में चिकित्सकों, पैरा-मेडिकल स्टाफ, पुलिस कर्मचारियों व एंबुलैंस ड्राईवरों को फल-फू्रट बांटा व नींबू पानी पिलाया।

    डेरा सच्चा सौदा ने कोरोना योद्धाओं को सेल्यूट कर उनका मान-सम्मान बढ़ाया। यह सच है कि चंद चिकित्सकों, विशेष तौर पर प्राईवेट अस्पतालों के चिकित्सकों पर मरीजों से लूट, लापरवाही व धक्केशाही के आरोप लगे हैं लेकिन बड़ी संख्या में चिकित्सक व पैरा-मेडिकल स्टाफ दृढ़ता व सेवाभाव से काम किया और जुटे भी हुए हैं। महामारी में अधिकतर चिकित्सकों व स्टॉफ ने अपनी छुट्टियां तक कैंसिल की और कई महिला चिकित्सकों/नर्सों को कई महीनों तक अपने छोटे-छोटे बच्चों से भी दूर रहना पड़ा है। गर्मी के मौसम में पीपीई किटें पहनकर काम करना बेहद कठिन है, इसीलिए जनता का कर्तव्य है कि वे चिकित्सकों के साथ सद्भावना व प्रेमभाव से पेश आएं। बिना वजह चिकित्सकों को परेशान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    महामारी से बचाव के उपायों के साथ जांच और टीकाकरण भी जरूरी है। ऐसे में जांच और वैक्सीनेशन के लिए गांवों में पहुंच रहे स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाना भी इस समस्या को और बढ़ाने वाला ही साबित होगा। किसी भी चिकित्सक द्वारा गलती या लापरवाही होने पर कानूनी कार्रवाई भी आवश्यक है लेकिन खुद ही चिकित्सकों की मारपीट कर देना गैर-कानूनी और इंसानियत के खिलाफ है। सजा देने का अधिकार न्यायलयों को है, किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। यदि चिकित्सकों से दुर्व्यवहार जारी रहा तब गंभीर मरीज को भर्ती करने से पहले चिकित्सक सौ बार सोचेगा। चिकित्सकों व उनके सहायक स्टॉफ का मान-सम्मान करना हम सबका कर्तव्य है।

     

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