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Friday, February 6, 2026
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    बचपन

    मैं बचपन को बुला रही थी
    बोल उठी बिटिया मेरी,
    नंदन-वन सी फल उठी वह
    छोटी-सी कुटिया मेरी।
    ‘माँ ओ’ कहकर बुला रही थी
    मिट्टी खाकर आई थी,
    कुछ मुँह में, कुछ लिए हाथ में
    मुझे खिलाने लाई थी।
    मैंने पूछा-यह क्या लाई?
    बोल उठी वह-‘माँ काओ’,
    फूल-फूल मैं उठी खुशी से
    मैंने कहा-‘तुम्हीं खाओ।’
    -सुभद्राकुमारी चौहान

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