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    गुरु जी की शिक्षा पर चलके डेरा श्रद्धालुओं ने रच दिया इतिहास, देखें अखबारों की जुबानी

    Cleanliness Campaign

    सरसा।(सच कहूँ न्यूज) पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की रहमत से हरियाणा में सफाई महा अभियान में साध-संगत ने पूरे उत्साह और तन्मयता के साथ भाग लिया। मात्र 5 घंटों में हरियाणणा के सभी शहर, कस्बे, गांव को चकाचक चमकाकर सबका दिल जीत लिया। साध-संगत के इस बेमिसाल सेवा कार्य की जहां लोगों ने दिल खोलकर प्रशंसा की। वहीं इस महा अभियान ने अखबारों में खूब सुर्खियां बंटोरी। आइए देखते हैं सफाई महा अभियान की कहानी अखबारों की जुबानी।

    Ram Rahim

    सच्चे दाता रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मंगलवार को शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से अपने अमृतमयी वचनों की वर्षा करते हुए साध-संगत को खुशियों से लबरेज किया। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि साध-संगत एक जनवरी से सतगुरु मौला के गुणगान देश-विदेश में सभी जगह पर गा रही है। क्योंकि ये महीना नया साल ही नहीं, नए युग को भी लेकर आया। कलियुग में एक ऐसा युग जहां, प्यार-मोहब्बत नि:स्वार्थ भावना से कैसे किया जाता है? ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम का सच्चा प्यार-मोहब्बत कैसे हासिल होता है? जिंदगी जीने में कैसा मजा है? और कैसे संतुष्टि के साथ तमाम खुशियों को हासिल करके भी अहंकार से बचा जा सकता है? ये सिखाने वाले इस जनवरी के महीने में आए। उस सच्चे दाता रहबर के अवतार महीने को एक जनवरी से मनाती हुई साध-संगत आज उनके अवतार दिवस के नजदीक पहुंच गई है।

    शाह सतनाम जी धाम सरसा में सुबह 11 बजे पावन भंडारा शुरू हो जाएगा। सबने जैसे-जैसे सेवादार भाई बताएं, उस पर अमल करना है। उसको मानना है। ताकि बेपरवाह जी की वो तमाम खुशियां, जो समुन्द्रों के रूप में आपकी झोली में आने वाली हैं, उसे आप समेट सकें। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अल्फ़ाजों में वो दम नहीं जो सच्चे दाता रहबर के रहमोकरम का वर्णन कर सकें। जुबां में वो ताकत नहीं, जो उनके गुणगान गा सके। कलम में वो हिम्मत नहीं, जो उनकी अपरम्पार लीला का पार पा सके। और किसी के दिमाग में वो शक्ति नहीं, जो उनके रहमोकरम को पहचान सके। जिन पर उनकी दया मेहर, रहमत होती है, जो दृढ़ यकीन करता है, उन्हीं को वो नजारे समझ में आते हैं।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आज का समय बड़ा ही भयानक है। हाथ को हाथ खाए जा रहा है, स्वार्थ के बिना कोई बात नहीं करता, कोई कितना भी भला कर ले, उस भले की चर्चा नहीं होगी, और कोई झूठ, तूफान, गलत बातें करता रहे, उसको लोग चस्का लेकर सुनते हैं। इसलिए लोग कहते हैं कि मसाले वाला सामान होना चाहिए। शायद बच्चे भी मसाले वाला सामान खाने लग गए हैं। हमारे समय में तो जानते ही नहीं थे कि पीजा क्या है? बर्गर क्या है? हम नहीं कहते कि आप खाओ या ना खाओ, हम यहां एक उदाहरण दे रहे हैं। जैसे-जैसे ये मसालेदार चीजें आ रही हैं, वैसे-वैसे लोग मसालेदार गप्प, मसालेदार झूठ सुनना पसंद करते हैं और वैसा ही लोग उनको परोसते हैं। कल साध-संगत ने एक दिन में पूरे हरियाणा को लगभग पाँच घंटे में साफ किया, क्या ये छोटी सी बात है? पर इसमें मसाला नहीं है। कैसा मसाला चाहिए?

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सेवादारों ने दुनिया की गंदगी साफ की, हम देख रहे थे, टॉयलेट साफ कर रही थी साध-संगत, जहां बहुत गंदगी थी हाथों से बाहर निकालकर फैंक रहे थे। टायलेट सीट को साफ कर रहे थे, जोकि सांझी जगहों पर लगी होती हैं। क्या ये छोटी सी बात है? कभी धरातल पर उतर कर देखिए और करके देखिये, आपको पता चल जाएगा। आपजी ने फरमाया कि बड़ी हैरानी होती है कि वो चीज नजर नहीं आती। तो आज का दौर बेपरवाह जी ने बदलना चाहा, कि लोग राम का नाम जपें, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, ख़ुदा, ईश्वर की भक्ति करें, उसकी याद में हमेशा परमानंद है। लेकिन बहुत कम लोग हैं, पूरी जनसंख्या के अनुसार जो आज इसे फॉलो करते हैं। बहुत कम लोग हैं, जो वो नज़ारे लूट पाते हैं, जो उन्होंने बताया।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आदमी का दायरा तंग हो चुका है, छोटी सोच, नैरो माइंड, चिंटी दीवार पर घूमती है वो हाल आज आदमी का है। ताजा प्लास्टर किया हो, आम भाषा में जिसे आप पलस्तर कहते हैं, दीवार पर चींटी घूमती है, उसको लगता है कि मौका है बिल बना लो। पुरानी दीवार पर घूमती है कि कहीं तरेड़ (दरार) मिल जाए, उसमें घुस जाऊं। ऐसा ही आज का दौर है। आज आदमी मसालेदार चीजें, झूठ, तूफान, बुराई, किसी की निंदा, किसी की चुगली, किसी को बुरा कहना, उसमें मजा लेना पसंद करते हैं और उसी को बताना पसंद करते हैं।

    और जो लोग दिन-रात मिलकर मानवता का भला कर रहे हैं, नशे छुड़वाना, बुराइयां छुड़वाना, मतलब क्या-क्या गिनवाएं, आज ऐसे भक्तजन कर रहे हैं, अपने आम में बेमिसाल है। पर कहते कि इसमें तो मसाला नहीं है जी। बड़ी हैरानीजनक बात है कि आज झूठ, तूफान के युग में लोगों को झूठ, बुराई की बातें ज्यादा पसंद आती हैं। अरे कभी ये सोचा करो, आप भी लग चलिये, अपने-अपने घरों को साफ कीजिये, ताकि साध-संगत को ये सफाई महा अभियान चलाने की जरूरत ही ना पड़े, ये करना ही ना पड़े। घर के सामने गली थोड़ी सी ही साफ करके तो देखिये कभी। शर्म आती है, हाथ में झाड़ू पकड़ते और कल आपने देखा होगा कि हमारे बच्चे छोटे से लेकर बड़ा, यानि छोटा बच्चा, उससे बड़ा युवा और बुजुर्ग सब लगे हुए थे, क्योंकि ऊँच-नीच को हम नहीं मानते, सभी धर्मों के लोग लगे हुए थे।

    क्योंकि सभी धर्मों में ये बताया गया है कि जहां वातावरण स्वच्छ होगा, वहां दिमाग में विचार भी अच्छे आएंगे, स्वस्थ आएंगे। जहां वातावरण स्वच्छ होगा परमपिता परमात्मा की, ओउम, हरि, अल्लाह, राम की वहीं याद आएगी। वातावरण दूषित है, खान-पान दूषित हो गया, देखना दूषित है, सुनना दूषित है तो आदमी बचेगा कैसे? हमारे धर्मों के पवित्र ग्रन्थों में बड़ा कुछ लिखा हुआ है, तो ये उसी का एक अंग था जो साध-संगत ने निभाया। हमसे कहा कि गुरु जी आपको तोहफा देंगे। कोई कुछ कहे या ना कहे लेकिन हम अपने उन बच्चों को बेइंतहा आशीर्वाद देते हैं, जिन्होंने सिर्फ पाँच घंटे में इतने बड़े हरियाणा को चकाचक कर दिया, एक महायज्ञ को कंप्लीट किया है, तो भगवान आपको खुशियों से मालामाल जरूर करेंगे। जो भी इस सेवा में जिस भी रूप में शामिल थे।

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