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    डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं का दूसरा नाम ‘रक्तदानी’

    Blood-Donation

    संगरूर ब्लॉक के सेवादारों ने एक साल में 200 यूनिट से अधिक किया ‘रक्तदान’

    • सोशल मीडिया पर रक्तदान के लिए हर पल तैयार रहते हैं डेरा श्रद्धालु

    संगरूर। (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह) पंजाब में डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं का दूसरा नाम ट्रयू ब्लड पंप (रक्तदानी) लिया जाता है। रक्तदान करने में डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कोरोना जैसी महामारी में जब कोई घरों से बाहर निकलने से भी डर रहा था और डॉक्टरों मुताबक रक्त की बेहद्द जरूरत थी, तब भी डेरा श्रद्धालुओं ने लगातार रक्तदान कर ब्लड बैंकों को अपने रक्त की थैलियों से भर दिया। पंजाब में 100 से अधिक ब्लॉक हैं, जिनमें डेरा सच्चा सौदे के श्रद्धालु समाज सेवी कार्य कर रहे हैं। अगर सिर्फ ब्लॉक संगरूर के पूरे साल की कार्यशैली की बात की जाए तो अन्य मानवता भलाई के कार्यों को छोड़कर अगर रक्तदान की बात की जाए तो इस साल भी ब्लॉक संगरूर के डेरा श्रद्धालुओं ने 200 से अधिक यूनिट रक्तदान कर जरूरतमंदों के इलाज में अपनी कीमती योगदान दिया है।

    इस संबंधी बात करते ब्लॉक संगरूर के डेरा श्रद्धालु समशेर सिंह रिंकू इन्सां ने बताया कि हर साल की तरह ब्लॉक के नौजवान डेरा श्रद्धालुओं द्वारा रक्तदान किया गया। उन्होेंने बताया कि 30 नवम्बर 2021 से 4 दिसंबर 2022 तक 200 से अधिक यूनिट रक्तदान किया गया। उन्होेंने बताया कि डेरा श्रद्धालुओं द्वारा सोशल मीडिया पर एक गु्रप बनाया गया है, जिसके द्वारा उनको समय पर जानकारी हासिल हो जाती है कि किस मरीज को रक्त की जरूरत है। इसके बाद उनके द्वारा रक्त के ग्रुप अनुसार डेरा श्रद्धालुओं की लिस्टें बनाई गई हैं और रक्तदान करने संबंधी जानकारी मिलने पर कुछ ही मिनटों में डेरा श्रद्धालु तुरंत खूनदान करने पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि डेरा श्रद्धालुओं ने आज तक किसी भी मरीज को रक्तदान के लिए निराश नहीं किया, बल्कि उनकी हर संभव सहायता की है।

    उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल और कैंसर अस्पताल में दूर-दूर से मरीज आते रहते हैं , जिनको रक्त की जरूरत पड़ती रहती है। इसके अलावा कोरोना के समय में सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक के लिए डेरा श्रद्धालुओं द्वारा रक्तदान किया गया था। युवा डेरा श्रद्धालु रिपन इन्सां ने बताया कि पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए ब्लॉक संगरूर के डेरा श्रद्धालु हर समय रक्तदान करने के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार दूसरे शहरों में पहुंचकर भी डेरा श्रद्धालुओं ने मरीजों के लिए रक्तदान किया है और किराया भी उन्होंने अपनी जेब में से लगाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसी भावना होना बेहद्द बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि यह सब पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की दया मेहर रहमत से ही संभव हो रहा है।

    ब्लॉक के डेरा श्रद्धालु हर समय रक्तदान के लिए तैयार : हरिन्द्र इन्सां

    डेरा सच्चा सौदा के 45 मैंबर हरिन्द्र इन्सां मंगवाल ने कहा कि अकेला संगरूर ब्लॉक ही नहीं, बल्कि पंजाब के सभी ब्लॉकों के डेरा श्रद्धालुप्रेमी रक्तदान करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में जहां दिखावे और खुदगर्जी का बोलबाला है, वहीं डेरा श्रद्धालुओं में ऐसी भावना अपने आप में बेमिसाल है। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरू जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा श्रद्धालु 147 मानवता भलाई के कार्य लगातार कर रहे हैं।

    80 से अधिक बार रक्तदान कर चुके कपिल कांत

    ब्लॉक संगरूर के डेरा श्रद्धालु कपिल कांत अब तक 80 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूज्य गुरू जी के पावन वचन सुने थे कि रक्तदान करना सबसे बड़े पुण्य का कार्य है और इससे स्वास्थ्य भी तंदरूस्त रहता है। इन पावन वचनों पर अमल करते उन्होंने 1998 से अब तक 80 बार रक्तदान किया है। उन्होंने बताया कि रक्तदान करने की निर्धारित आयु से वह रक्तदान करने लगे थे। उन्होंने बताया कि अब तक वे 10 बार प्लेटलैट्स सैल के अलावा 2 बार एसडीपीसी सैल भी दान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह रक्तदान करने के लिए अपने खर्च पर पीजीआई चंडीगढ़, डीएमसी लुधियाना, फोर्टिस मोहाली, सनराईज चंडीगढ़ जैसे अस्पतालों में जा चुके हैं।

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