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    Geetika Jakhar: गीतिका जाखड़ की दमदार पहचान, अर्जुन पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला पहलवान

    Geetika Jakhar

    Indian Wrestling: नई दिल्ली। भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में Geetika Jakhar का नाम एक मजबूत और प्रेरणादायक खिलाड़ी के रूप में लिया जाता है। अपने शानदार खेल और लगातार जीत की बदौलत उन्होंने देश में महिला कुश्ती को नई पहचान दिलाई। नौ बार भारत केसरी का खिताब जीतने वाली गीतिका ने अपने प्रदर्शन से लंबे समय तक कुश्ती जगत में दबदबा बनाए रखा। Geetika Jakhar

    गीतिका जाखड़ का जन्म हरियाणा के Hisar में 18 अगस्त 1985 को हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव खेलों की ओर था और शुरुआती दिनों में वह एथलेटिक्स में सक्रिय रहती थीं। बेहतर शिक्षा के लिए जब उनका परिवार शहर में आया, तो उनके पिता उन्हें महाबीर स्टेडियम लेकर गए थे, लेकिन उस समय वहां उपयुक्त कोच न मिलने के कारण वे निराश लौट आए। इसी दौरान गीतिका की नजर पास में चल रहे कुश्ती अभ्यास पर पड़ी। वहां की ऊर्जा और खिलाड़ियों की मेहनत ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने एथलेटिक्स छोड़कर कुश्ती को अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया। अक्टूबर 1998 से उन्होंने गंभीरता से कुश्ती का अभ्यास शुरू कर दिया।

    विरासत में मिला कुश्ती का हुनर | Geetika Jakhar

    गीतिका को कुश्ती की प्रेरणा अपने परिवार से मिली। उनके दादा चौधरी अमरचंद जाखड़ अपने समय के प्रसिद्ध पहलवान माने जाते थे और उन्होंने ही गीतिका को इस खेल की शुरुआती बारीकियां सिखाईं। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने प्रतियोगी कुश्ती में कदम रखा।

    1999 में मणिपुर में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए वह चौथे स्थान पर रहीं। इसके बाद उन्होंने तेजी से प्रगति की और केवल 15 वर्ष की उम्र में भारत केसरी का खिताब जीतकर सबको चौंका दिया। नई दिल्ली में आयोजित एक दंगल में उन्होंने प्रसिद्ध पहलवान Chandgi Ram की बेटी सोनिका कालीरमन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इसके बाद लगातार नौ वर्षों तक उन्होंने यह खिताब अपने नाम किया। Geetika Jakhar

    गीतिका जाखड़ ने 2001 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर तीनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया। इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली पहलवान बनीं। 2010 में गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मजबूत वापसी करते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीते।

    मुख्य रूप से 63 किलोग्राम भार वर्ग में खेलने वाली गीतिका ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने Commonwealth Games 2014 में रजत पदक जीता। इसके अलावा Asian Games 2006 में रजत और Asian Games 2014 में कांस्य पदक हासिल किया। एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भी उन्होंने कई बार पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इसके साथ ही कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किए।

    अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित | Geetika Jakhar

    भारत सरकार ने उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2006 में उन्हें Arjuna Award से सम्मानित किया। इस सम्मान को पाने वाली वह देश की पहली महिला पहलवान बनीं। बाद में हरियाणा सरकार ने 2008 में उन्हें पुलिस विभाग में उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त किया। आज गीतिका जाखड़ की कहानी देश की युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह बताती है कि दृढ़ निश्चय और मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।