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Thursday, February 19, 2026
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    आतंक को पालने के लिए पैसे दे रहे इमरान खान

    Imran Khan, who is giving money to raise terror

    जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के अवन्तीपुरा में आतंकवादियों द्वारा आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 46 जवानों की मौत से सारे देशवासी हतप्रभ हैं और पूरे देश में आक्रोश है। पूरे देश में गुस्से और बदले की भावना फैलती जा रही है। सरकार निर्णायक कदम उठाने की दिशा में कदम उठा रही है क्योंकि उसके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा हुआ है। भारत द्वारा इस हमले के प्रतिकार की प्रकृति और विशालता के बारे में बात करने से पहले हमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विभिन्न बयानों से पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को समझना होगा। भारत में सभी लोग सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि वे इस बारे में कार्यवाही करें तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस जघन्य हमले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान को सेना और कुछ आतंकवादी तत्वों ने सत्ता में बिठाया है।

    वे नए पाकिस्तान की बात करते हैं जिसमें लोग चाहते हैं कि वहां स्थिरता आए। वे पाकिस्तानवासियों से कह रहे हैं कि ऐसे हमलों से बाहर आएं किंतु इमरान खान जानते हैं कि सारा विश्व समझता है कि पाकिस्तानी सेना आतंकवाद से पोषित होती है और वह आतंकवादियों को प्रायोजित करने के लिए धन देता है। विश्व समुदाय जानता है कि अफगानिस्तान में आतंकवादियों का सामना करने के लिए पाकिस्तान को अरबों डालर की सहायता दी गई जिसमें से अधिकतर राशि का उपयोग उसने भारत में आतंकवाद को प्रायोजित करने के लिए किया। वर्तमान अमरीकी राष्ट्रपति ने इस बात को स्पष्ट शब्दों में कहा है इमरान खान को पाक सेना के बजट पर अंकुश लगाना चाहिए जिससे पाकिस्तान को लाभ होगा जहां पर सेना की तूती बोलती है।

    इमरान खान ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद से पीड़ित रहा है और पाकिस्तान ने 70 हजार लोगों की जान और करोड़ों बिलियन डालर के रूप में इसकी कीमत चुकाई है। पाकिस्तान ऐसा कहकर अंतर्राष्ट्रीय जगत से सहानुभूति प्राप्त करना चाहता है। खान को जानना चाहिए कि जो लोग तलवार से खेलते हैं उनकी मौत भी तलवार से ही होती है। यह भी कहा जाता है कि जो दूसरे के लिए खाई खोदते हैं वे स्वयं भी उसमें गिर जाते हैं। इसलिए यदि पाकिस्तान ने आतंकवादियों को प्रश्रय देना बंद नहीं किया तो आतंकवादी उसे भी निगल जाएंगे। खान ने यह भी कहा कि वह आतंकवाद सहित भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार है और भारत की शर्त भी यही है कि वार्ता से पहले आतंकवाद पर बातचीत की जाए। किंतु भारत पाकिस्तान के दोगलेपन से परिचित है। एक ओर वह बातचीत का न्यौता देता है तो दूसरी ओर आतंकवाद को प्रायोजित करता है।

    पठानकोट, उरी और कारगिल के बाद वार्ता प्रक्रिया शुरू हुई। पाकिस्तान अब अपनी धोखेबाजी के लिए दुनिया में जाना जाता है। शांति की पहल के बारे में उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है किंतु वह आतंकवाद का केन्द्र बन गया है। उसके निशाने पर न केवल भारत है अपितु ईरान ने भी आरोप लगाया है कि पाकिस्तान उसकी धरती पर आतंकवाद को प्रायोजित कर रहा है। इमरान खान ने अफगानिस्तान का हवाला देते हुए कहा कि वहां पर 17 सालों तक सैनिक कार्यवाही का कोई परिणाम नहीं निकला और अंतत: दोनों संघर्षरत गुटों को वार्ता के लिए सामने आना पड़ा। किंतु अफगानिस्तान में भी पाकिस्तान के दोगलेपन के कारण शांति भंग हो रही है। एक ओर उसने तालिबान को समर्थन दिया तो दूसरी ओर तालिबान पर अंकुश लगाने के नाम पर अमेरिका से पैसा लिया। यदि तालिबान समाप्त हो जाएगा तो फिर पाकिस्तान को अमेरिका से पैसा नहीं मिलेगा। अमेरिका ने जैसे ही इस बात को समझा उसने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया।

    तथापि किसी भी वार्ता प्रक्रिया के लिए आवश्यक है कि संघर्षरत गुट पहले हथियचार ड़ालें। इमरान खान ने पूछा कि इस समय कौन सा कानून किसी एक देश को न्याधीश, निर्ण्णायक और सजा देने वाला बन ता है। उन्होने विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि हाल के हमलों में पाकिस्तान की संलिप्तता के प्रमाण बताइए। किंतु खान भूल गए कि भारत में आतंकवादी हमले पाकिस्तन सेना और आईएसआई की सांठगांठ से होते हैं। पाकिस्तान को ढेर सारे सबूत दिए गए ओर पुलवामा हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने जिम्मेदारी ली है। फिर ऐसे में प्रमाण मांगना हास्यास्पद है। क्या इमरान खान नहीं जानते कि पाकिस्तान में कितने आतंकवादी गुट सक्रिय हैं। दाउद इब्राहीम वहां खुला घूम रहा है। ओसामा बिन लादेन सैनिक अड्डे के नजदीक रहता था। इसलिए पाकिस्तान नेतृत्व आतंकवाद के बारे में कुछ भी बोल सकता है।

    इमरान खान ने दावा किया कि भारतीय सेना द्वारा किसी भी कार्यवाही का पाकिस्तान मुंह तोड़ जवाब देगा। उन्होने कहा कि युद्ध शुरू करना आसान है किंत ुसमाप्त करना कठिन है। युद्ध समाप्त करना ईश्वर के हाथों में है। भारतीय सेना जानती है कि पाक सेना बदले की कार्यवाही करेगी। वह उसके लिए तैयार है। किंतु इमरान खान को जानना चाहिए कि बदले की कार्यवाही भारत कर रहा है पाकिस्तान ने आतंकवादियों के माध्यम से पहले ही युद्ध छेड़ दिया है। युद्ध व्यक्तियों के हाथ में है और इसकी शुरूआत भी और अंत भी व्यक्ति के हाथ में है। सद्दाम हुसनैन ने भी अपने विरोधियों के विरुद्ध ईश्वर के नाम पर युद्ध की दुहाई दी थी। ईश्वर अपने बच्चों को किसी भी रूप में हिंसा की सलाह नहीं देता है। इमरान खान को हम यह स्पष्ट करना चाहते हें कि भारत युद्धप्रिय देश नही है। पाकिस्तान के विपरीत यह शांतिप्रिय, बहुधािर्मक और लोकतांत्रिक देश है। भारत अपने सुरक्षा बलों को निहत्थे नागरिकों पर आक्रमण करने से रोकता है हालांकि ऐसे नागरिक सुरक्षा बलों के साथ बदसलूकी करते हैं और इसका उदाहरण कश्मीर घाटी में जनता द्वारा भड़काऊ कार्यवाही के बावजूद हमारे सुरक्षा बलों का आचरण है।

    जबकि पाकिस्तान ने इस परिदृश्य को बदल दिया है और वह आत्मघाती बम दस्तों के माध्यम से हमारी सेना पर हमला कर रहा है। सभी विकल्प समाप्त होने के बाद भारत को आतंकवादी पाकिस्तानी राज्य के विरुद्ध कार्यवाही करनी होगी। पाकिस्तान ने भारत में चुनावों की बात की किंतु उन्हें ध्यान में रखना होगा कि भारतीय सेना गैर-राजनीतिक है और उसे देश में सभी राजनीतिक दलों, धर्मों, पंथों का समर्थन प्राप्त है। भारत में सेना की कार्यवाही के लिए चुनाव मुद्दा नहीं है। जबकि पाकिस्तान में सेना सरकार बनाती है, बर्खास्त करती है और आतंकवादियों को पनाह देती है। अंत में उन्होने कहा कि हमें कश्मीर के मुद्दे पर आत्मवालोकन करना चाहिए और इस बात से हम सहमत हैं।

    हम इस बात पर आत्मावलोकन करेंगे कि पाकिस्तान को किस प्रकार कश्मीर के उस हिस्से से अलग करें जो उसके कब्जे में है। हम मांग करते हंै कि वे पाक अधिकृत कश्मीर को खाली करे ताकि कश्मीर का भारत में विलय पूरा हो। हम देर-सवेर इसे प्राप्त कर ही लेंगे। अब हम इस बात पर विचार करेंगे कि क्या पाकिस्तान हमसे किसी भी रियायत का हकदार है। भारत ने पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड़ नेशन का दर्जा दिया जबकि उसने ऐसा नहीं किया। हम इस बात पर विचार करेंगे कि अलगाववादियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए। हम बलोच लोगों की व्यथा पर विचार करेंगे जो पाक राज्य के दमन से मुक्ति की मांग कर रहे हैं।

    इसलिए हम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बताना चाहते हैं कि हम पाकिस्तान के साथ शांति और मैत्री चाहते थे किंतु आपने युद्ध की घोषणा कर दी है। पाकिस्तान कुत्ते की पूंछ की तरह है जो कभी सीधी नहीं होती और उसे काटना ही पड़ता है। हम अपने विरुद्ध आपकी युद्ध की इच्छा को पूरा करेंग और यह कूटनयिक, आर्थिक, सामाजिक और सामाजिक सभी मोर्चां पर शुरू हो गया है। हम आपको बताना चाहते हैं कि हमारे देश में ऐसे लोग हैं जो चाहते हैं कि एक प्रधानमंत्री के रूप में आपको एक अवसर दिया जाए क्योंकि आपने सुलह की बातें की थी।

    मैं भी उनमें से एक था हालांकि हम जानते थे कि आप पाक सेना और आईएसआई के मुखौटे हैं। आपने कार्यवाही करने का वायदा किया किंतु प्रमाण मांगकर उपहासजनक बात कर दी। आप जानते हैं कि आपके देश में आतंकवादी हैं। क्या आप उन्हें गिरफ्तार कर उन्हें भारत को सौंपेंगे? यदि आप ऐसा करते हंै तो फिर हम बातचीत करेंगे अ‍ैेर सभी द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाएंगे। क्या आप ऐसा कर पाएंगे? क्या आप अपनी सेना का सामना कर पाएंगे? और यदि नहीं तो कुपया हमें उपदेश देना बंद करें।

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