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    उद्योग ‘सुरक्षित’ हों

    पंजाब के डेराबस्सी क्षेत्र में एक Industries में गैस लीक होने से कई मजदूरों की तबीयत बिगड़ गई। इसी तरह कई दिन पहले लुधियाना में भी सीवरेज में कैमिकल डालने के कारण बनी जहरीली गैस के कारण 11 की मौत हो गई थी। फिलहाल मामले की जांच एक स्पैशल जांच टीम कर रही है। दरअसल, औद्योगिक शहरों में ऐसी घटनाएं रुक नहीं रही। कमोबेश, इसी तरह लुधियाना के एक खाली प्लांट से हजारों लीटर तेजाब लावारिस हालत में पड़ा हुआ मिला है। पंजाब में गैस लीक के हादसे निरंतर घटित होना चिंताजनक है।

    यह मामला एक-दो घटनाओं की जांच के चलते केवल दोषियों को सजा व जुर्माना लगाने से समाधान होने वाला नहीं, बल्कि इस संबंधी एक सुदृढ़ व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि जानलेवा हादसे टल सकें। (Industries) फैक्ट्रियों में कार्यरत मजदूरों को इस बात की पूर्ण प्रशिक्षण व जानकारी दी जाए कि हादसा कब और क्यों होता है। साथ ही हादसे के दौरान बचाव के तरीकों की जानकारी भी समय-समय पर दी जाए। फैक्ट्रियों में कैमिकल की संभाल व जांच भी संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा बिना किसी लापरवाही के करना आवश्यक है। लापरवाही व जानकारी के अभाव में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं जानी चाहिए, यह संवेदनशील मामला है।

    प्रशासन को भी अपनी जिम्मेवारी के प्रति सतर्क रहना चाहिए। वास्तव में नियमों की पालना सुनिश्चित करवाने में कुछ विभागीय अधिकारी लापरवाह हो जाते हैं, जिस कारण अप्रिय घटनाएं घटित हो जाती हैं। अधिकतर अधिकारी (Industries) का दौरा किए बिना कार्यालय बैठे-बिठाए ‘सब अच्छा’ का सर्टीफिकेट देकर अपनी ड्यूटी से पल्ला झाड़ लेते हैं। फिर भी जरूरी है कि लोगों के चुने हुए नुमाइंदे सरपंच, पंच, एमसी, प्रधान, मेयर, विधायक व सांसद भी अपने-अपने क्षत्रों में नियमों की पालना करने को यकीनी बनाएं। यह भी जरूरी है कि समाज में वैज्ञानिक जागरुकता का संचार हो।

    फैक्ट्रियों के नजदीक लोगों को भी हादसों के दौरान मानवीय स्वास्थय पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझने के लिए शारीरिक लक्ष्णों की जानकारी दी जाए। उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। आगामी समय में फैक्ट्रियों की गिनती और स्तर में वृद्धि होना तय है। सरकार को उद्योगों पर बल देने के साथ-साथ सुरक्षित उद्योग के प्रस्ताव पर भी कार्य करना चाहिए। भोपाल गैस त्रासदी को याद कर आज भी दिल कांप जाता है। औद्योगिक विकास के साथ-साथ मानवीय हितों व सरोकारों को भी अहमियत दी जानी चाहिए।

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