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    Opium : अफीम इलाज नहीं, सिर्फ नशा है

    Opium

    विशेष बातचीत: समाज में पैदा भ्रांतियों पर डॉ. अमनदीप ने बेबाकी से रखी बात || Opium

    • अधरंग के मरीज दें विशेष ध्यान
    गुरप्रीत सिंह। समाज में नशे का प्रकोप दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। नशे की रोकथाम के लिए राज्य व केंद्र सरकार द्वारा कई तरह से प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दिनों पंजाब विधानसभा में अफीम (Opium) की खेती का मुद्दा भी चर्चा में रहा। दरअसल, अज्ञानता और अनपढ़ता के कारण आज भी लोगों में नशों को लेकर कई तरह की भ्रांतियां विद्यमान हैं। लोगों में यह आम धारणा है कि अफीम खाने से कई बीमारियों में आराम मिलता है, किंतु ऐसा नहीं है। बेशक दवाइयों में इसका इस्तेमाल होता है, लेकिन उसके लिए वैज्ञानिक पहले रिसर्च करते हैं। इस अफीम के वैज्ञानिक नजरीये को समझने के लिए दैनिक सच कहूँ ने संगरूर (पंजाब) के विशेषज्ञ चिकित्सक अमनदीप अग्रवाल से विशेष बातचीत की, जिन्होंने समाज में फैली भ्रांतियों से अवगत करवाया।
    प्रश्न: डॉ. साहब, पंजाब में अफीम का बड़ा ‘महिमामंडन’ किया जा रहा है। यदि अफीम हमारे स्वास्थ्य के लिए इतनी ही अच्छी है तो फिर यह गैरकानूनी क्यों हैं?
    उत्तर: अफीम (Opium) का उपयोग सदियों से प्राकृतिक दर्द निवारक दवा के रूप में अप्रत्यक्ष रूप किया जाता रहा है। सार्इंस के नजरीये से दवाओं में इसका इस्तेमाल कई बीमारियों के उपचार के तौर पर किया जाता है। लेकिन अफीम का सीधा प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अकसर लोगों में यह आम धारणा है कि घर में अफीम अवश्य रखनी चाहिए। लोगों में यह भ्रांति है कि अधरंग यानि लकवा का दौरा अफीम घोलकर देने से ठीक हो जाता है।
    यही नहीं, लोगों का यह भी मानना है कि दिल का दौरा पड़ने पर अफीम से फायदा होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि अफीम या भांग-पोस्त जैसे नशों में ऐसा कोई गुण नहीं होता, क्योंकि इन दवाओं में बहुत तेज दर्द निवारक गुण होते हैं, इसलिए किसी भी बीमारी (हार्ट अटैक इत्यादि) या किसी अन्य के कारण होने वाले दर्द में रोगी को अफीम देने से दर्द बेशक कम हो जाता है या कुछ समय के लिए थोड़ी राहत मिल जाती हैै लेकिन असल में इसका बीमारी में कोई फायदा नहीं होता। अपितु व्यक्ति लापरवाह होकर रोग का उचित उपचार कराने में देरी कर देता है, जिससे इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
    सवाल: ऐसा कहा जाता है कि अधरंग अटैक के दौरान यदि इसे मरीज को दिया जाए तो वह अटैक से बच जाता है, क्या यह सच है?
    उत्तर: एक और धारणा प्रचलित है कि नशा छोड़ने से लकवे का दौरा पड़ने का खतरा रहता है या कहें कि जान जाने का खतरा रहता है आदि। ये सभी गलत धारणाएं हैं और अधिकतर लोग नशा न छोड़ने की मंशा से इस बात को प्रचारित करते हैं। नशीली दवाओं के व्यापारी या नशीली दवाएं बेचने वाले लोग भी ऐसी भ्रामक अफवाहें फैलाते हैं ताकि लोग नशा न छोड़ें और उनके कारोबार पर विपरीत प्रभाव न पड़े।
    प्रश्न: बच्चों को दस्त होने पर अफीम का प्रयोग कितना सही है?
    उत्तर: प्राचीन काल से ही ऐसी धारणा प्रचलित है कि यदि किसी बच्चे को दस्त की शिकायत हो तो थोड़ी सी अफीम चटाने से दस्त ठीक हो जाता है या यदि बच्चा रोना बंद नहीं करता है तो थोड़ी सी अफीम (Opium) चटाने से बच्चा शांत हो जाता है और सो जाता है। यहां यह समझना बहुत जरूरी है कि यह नजरिया बिलकुल ही गलत और खतरनाक है, क्योंकि बच्चों के इस आयु में अफीम को जहर माना जाता है और इससे बच्चे की मौत भी हो सकती है।
    सवाल: मधुमेह रोगियों को अफीम खाने की सलाह दी जाती है, क्या यह सही है?
    उत्तर: हाँ, ऐसी भ्रांति भी लोगों में विद्यमान है, कहा जाता है कि अफीम का सेवन करने वाले को मधुमेह की बीमारी नहीं होती या मधुमेह होने पर अफीम खाने से लाभ मिलता है। यह धारणा भी पूरी तरह से गलत है और हमेशा याद रखना चाहिए कि अफीम में ऐसा कोई गुण नहीं है जिससे मधुमेह जैसी बीमारी का इलाज हो।
    प्रश्न: क्या अफीम में स्वास्थ्य वर्धक तत्व होते हैं?
    उत्तर: अफीम या भांग-पोस्त जैसे पदार्थों में ऐसे कोई स्वास्थ्यवर्धक गुण नहीं होते और न ही इन्हें छोड़ने से कोई नुकसान होता है, अपितु नशा छोड़ने से जीवन बेहतर हो जाता है। एक महत्वपूर्ण बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि घर में अफीम-पोस्त आदि रखना एक गंभीर कानूनी अपराध है और एनडीपीएस अधिनियम के तहत कारावास की सजा का प्रावधान है।
    सवाल: आमजन को क्या संदेश देना चाहते हैं?
    उत्तर: अफीम या ऐसे अन्य नशीले पदार्थों से सौ प्रतिशत परहेज करना चाहिए। यदि इसकी खेती करने की मंजूरी मिल गई तो हर घर में नशेड़ी पैदा हो जाएंगे। रोजाना अफीम और पोस्त खाने से इसकी लत लग जाती है, इस आदत से छुटकारा पाने के लिए दवाइयों का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रकृति ने हमें शरीर के रूप में अनमोल खजाना दिया है, इसे नशे में बर्बाद नहीं करना चाहिए।
    -डॉ. अमनदीप अग्रवाल, मैमोरियल अस्पताल, संगरूर (पंजाब)।

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