हमसे जुड़े

Follow us

17.8 C
Chandigarh
Monday, February 23, 2026
More

    हुआ उजाला

    अंधकार की काली चादर,
    धरती पर से सरकी।

    हुआ उजाला जग में कोई,
    बात नहीं है डर की।

    चींचीं चींचीं चिड़िया बोली,
    डाली पर कीकर की।

    कामकाज बस शुरू हो गया,
    सबने खटर-पटर की।

    लाया है अखबार खबर सब,
    बाहर की, भीतर की।

    घंटी बजी, दूध मिलने में,
    देर नहीं पल भर की।

    मैं सुनता रहता आवाजें,
    सभी रसोईघर की।

    मम्मी के जादू से लो जी,
    सीटी बजी कुकर की।

    डॉ. दिनेश दधीचि

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।