बच्चों को बनाएं समझदार और मिलनसार

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Make Kids Smart

ब च्चे अपने माता-पिता को देखकर ही सब कुछ सीखते है जैसे चलना-बैठना, बोलना, खाना-पीना इत्यादि। बच्चों के लिए उनके माता-पिता हमेशा उनके उदहारण होते हैं, कभी-कभी मुसीबत पड़ने पर वो उनके द्वारा बताए गए मार्गदर्शन का पालन भी करते हैं, और बच्चों को छोटी उम्र से ही यह आदत पड़ जाती है। जैसे-जैसे बच्चे बढ़ते हैं, वह अपने माता-पिता के व्यवहार और कार्यों का अनुकरण करते हैं, बच्चों के लिए उनके माता-पिता आदर्श होते हैं। उनकी बुद्धिमत्ता और आदतें भी बच्चों में जाती है हैं। इसलिए, बच्चों को अच्छी और बुरी आदतों के बीच का अंतर समझाना और अच्छी आदतों को अपनाने के लिए कहना जरूरी होता है।

बच्चों में ये अच्छी आदतें होना जरूरी

1. स्वस्थ खान-पान: बच्चे ज्यादातर फास्ट फूड, चिप्स, मिठाई, बिस्कुट, और चॉकलेट की मांग करते हैं। आपको उन्हें यह विश्वास दिलाना होगा कि स्वस्थ भोजन भी उतना ही स्वादिष्ट हो सकता है। उन्हें नूडल्स, पास्ता, केक, कुकीज और पिज्जा घर पर बना कर खिलाएं। बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदत को विकसित करने के लिए, रंग-बिरंगे व्यंजन बनाएं, लक्ष्य स्थापित करें कि हफ्ते के हर दिन इंद्रधनुष के रंगों में से किसी एक रंग का खाना उन्हें खाना पड़ेगा, इस तरह वह हर बार भोजन में विभिन्न रंगों से बना खाना खाएंगे। इससे न केवल स्वास्थ्य लाभ होता है, बल्कि बच्चों को इसे खाने में मजा भी आएगा। माता-पिता को नियमित रूप से, पौष्टिक और संतुलित भोजन करके बच्चों के लिए अच्छी मिसाल पेश करनी चाहिए।

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2. शारीरिक श्रम वाले काम: अपने बच्चों को बैठे रहने और सोफा पर आराम करने और टेलीविजन देखने की अनुमति देना, माता-पिता के रूप में आपकी ओर से एक बड़ी गलती होगी। अपने बच्चों को एक स्थानबद्ध जीवन शैली न अपनाने दें। उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहित करें, चाहें टहलने या व्यायाम करने या बाहर जा कर खेलने के लिए। आप पारिवारिक कार्यक्रम का आयोजन करें, इसे कुछ मजेदार बनाएं, और अपने बच्चों को इसमें शामिल करें। अपने बच्चों को समझाएं कि पूरे समय एक ही स्थान पर बैठे रह कर टीवी देखते रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

3. खाद्य में पोषक तत्व पर ध्यान दें ना की उसके डिजाइन पर: एक निश्चित उम्र में, विशेष रूप से उनके किशोरावस्था के आसपास, आपका बच्चा अपने कपड़ों के लेबल में रुचि लेने लगता है। अपने बच्चों को उन अधिक महत्वपूर्ण लेबलों के बारे में शिक्षित करना शुरू करें, जिन पर उन्हें कम उम्र से ही ध्यान देना चाहिए, जैसे खाने की चीजों पर लगे लेबल। जब उन्हें यह आदत पड़ जाए, तो उन्हें इसी तरह से भोजन के पोषक तत्वों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें उनके पसंदीदा खाद्य पदार्थ दिखाएं और उस पर लिखी महत्वपूर्ण जानकारी की ओर उनका ध्यान आकर्षित करें। उन लेबलों को पढ़ना, पोषण मूल्य का विश्लेषण करना और फिर उसके महत्व को तय करने की आदत उन्हें डालें। उन्हें संतृप्त और असंतृप्त वसा, शक्कर, कैलोरी और कार्ब्स की मात्रा जैसे प्रमुख तत्वों पर ध्यान केंद्रित करने के बारे में समझाएं। आपके सक्रिय प्रयास अच्छी आदतों को विकसित करने में मदद करेंगे, जो वे जीवनभर पालन करते रहेंगे।

4. परिवार के सभी सदस्यों के साथ भोजन का आनंद लें: आज हमारा जीवन जितना व्यस्त रहता है, उसमें परिवार और बड़ों के साथ मूल्यवान समय बिताने के लिए शायद ही किसी के पास फुरसत रहती है। एक व्यस्त कार्य जीवन के कारण हो सकता है कि आप बच्चों के साथ बैठकर उनकी कहानियों और व्यक्तिगत मुद्दों को सुनने का समय न निकाल सकें। अपने परिवार के सदस्यों के साथ डिनर के समय का आनंद लेना को अपनी प्राथमिकता बनाएं। आप कई चीजों पर चर्चा कर सकते हैं और एक-दूसरे के साथ अपने विचार साझा कर सकते हैं; इससे आपके बच्चों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। बच्चे सहज होने लगते हैं और परिवार में अच्छा तालमेल रहता है। बच्चे खान-पान की अच्छी आदतें विकसित करते हैं और बड़ों के साथ खाते समय जंक-फूड खाने से बचते हैं। लोगों के बीच संबंध मजबूत होते हैं।

5. स्वस्थ हाइड्रेशन: छोटे बच्चों द्वारा बड़ों का अनुकरण करते हुए शीतल पेय पीना आमतौर पर देखा जाता है। आपको अपने बच्चों का मार्गदर्शन करना चाहिए और सादा पानी पीने और सोडा से बचने के महत्व को सुदृढ़ करना चाहिए। बस बच्चों को बताएं कि पानी स्वास्थ के लिए अच्छा होता है और यह कई बीमारियों से छुटकारा पाने में मदद करता है; जबकि शीतल पेय अस्वास्थ्यकर होते है, क्योंकि उनमें बहुत अधिक मात्रा में चीनी होती है जो कैलोरी को बढ़ाते हैं, जिससे वजन बढ़ता है। उन्हें शिक्षित करें कि पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन है, और उचित हाइड्रेशन स्तर बनाए रखने के लिए पानी ज्यादा मात्रा में पीना चाहिए। जब आपके बच्चे समझेंगे कि उनके शरीर के लिए पानी कितना महत्वपूर्ण है, तो वे नुक्सानदायक पेय के बजाए पानी को चुनेंगे।

6. अपनी चीजें व्यवस्थित करना: बच्चों को बचपन से ही स्वच्छता जरूर सिखाई जानी चाहिए। बच्चों के आसपास चीजों को ठीक से व्यवस्थित करके स्वच्छता सिखाना शुरू करें। जब वे चीजों को व्यवस्थित देखने के आदी हो जाएंगे, तो वे उन्हें भी उसी तरह रखना चाहेंगे। जब वे थोड़े बड़े हो जाए, तो आप उनकी सहायता कर सकते हैं और गंदगी को साफ करने और उन्हें सही तरीके से व्यवस्तित करने के लिए समय निर्धारित करें। नियमित रूप से ऐसा करने से, वह जल्द ही सीख जाएंगे और अपनी चीजों को स्वयं व्यवस्थित करने का प्रयास करेंगे।

7.रुपये-पैसे को लेकर जिम्मेदार बनाएं: जैसे ही आपके बच्चे इतने जिम्मेदार बन जाएं कि वह जाकर सामान खरीदने के लिए रुपये-पैसे का उपयोग कर सकें, तब आप उन्हें कड़ी मेहनत की कमाई के मूल्य के बारे में शिक्षित करना शुरू करें। आप अपने बच्चों को पैसे बचाने की आदत डालने के लिए उन्हें कभी-कभी पॉकेट मनी दे सकते हैं या उनके साथ मिलकर गुल्लक में पैसे रख सकते हैं।

8. एक-दूसरे के साथ बांटना ही ख्याल रखना है: बच्चों को कुछ चीजों का मूल्य समझ आना चाहिए, उन्हें आभारी होना सीखना चाहिए और इतना विनम्र होना चाहिए कि वे उन लोगों के साथ चीजों को साझा करें जो उन चीजों को खरीदने का सामर्थ्य नहीं रखते। उन्हें उन अमूर्त चीजों के बारे में भी सिखाएं जिन्हें साझा किया जा सकता है, जैसे कि भावनाएं, उमंग और कहानियां। बच्चे पहले अपने परिवार के साथ साझा करना सीखेंगे, माता-पिता, दादा-दादी, भाई-बहन, चचेरे भाई-बहन विस्तारित परिवार के साथ और फिर अन्य लोगों के साथ। बांटने का यह आदत उसे एक बेहतर इंसान बनाएगी।

9. सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें: अपने बच्चों को सभ्य और जिम्मेदार नागरिक बनना सिखाएं। उन्हें बताएं कि सार्वजनिक स्थान कूड़ा फेंकने के लिए नहीं हैं और कचरे को निकटतम कूड़ेदान में फेंकना चाहिए। उन्हें इस आसान आदत को विकसित करने में मदद करें, और उन्हें हर जगह इसका पालन करने के लिए कहें, क्योंकि यह उन्हें बेहतर व्यक्ति बनने में मदद करेगा। उन्हें गंदगी न फैलाने की आदत डालें, और आपके बच्चे आपकी मिसाल का अनुकरण जरूर करेंगे। हमेशा जब घर के बाहर हों तो चीजों को फेंकने के लिए डस्टबिन की तलाश करें। घर से बाहर कदम रखने से पहले आप अपने साथ एक छोटा-सा प्लास्टिक बैग लें और उसमें अपना सारा कचरा इकट्ठा करें, खाली पानी की बोतलें, पेपर नैपकिन आदि। रेस्तरां में गंदगी मेज पर छोड़ने या सड़क के किनारे पर फेंकने या कार की खिड़की से बाहर फेंकने के बजाय इसे घर ले आएं और कूड़ेदान में फेंके।

10. विनम्र बने: विनम्र होना ऐसा गुण है, जिसकी हर कोई प्रशंसा करता है। अपने बच्चों को लोगों का सम्मान करना सिखाएं, चाहे वे बुजुर्ग हों या उससे छोटे हों। उन्हें समझाएं कि भले ही वह किसी ऐसे व्यक्ति के सामने हो जो उन्हें पसंद नहीं है, तब भी उन्हें विनम्र और सभ्य तरीके से बात करनी चाहिए। उन्हें सभी के साथ शांत और सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। ये गुण जीवन भर उनके साथ रहेंगे, और उन्हें हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखा जाएगा। पहले अपने बच्चों के साथ सम्मान से पेश आना शुरू करें, और आप देखेंगे कि वह इस आदत को खुद ही सीख लेंगे। सेविका के साथ विनम्रता से पेश आएं। बच्चे जो देखते है वही करते है।

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