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    Kargil Diwas: भिवानी के शहीद कंवरपाल शेखावत ने पाकिस्तान को को ऐसे धूल चटाई थी, और फिर….

    Kargil Diwas
    Kargil Diwas: भिवानी के शहीद कंवरपाल शेखावत ने पाकिस्तान को को ऐसे धूल चटाई थी, और फिर....

    भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। Kargil Diwas: भाारत द्वारा कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह युद्ध वर्ष 1999 में तत्कालीक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व में घुसपैठियों के खिलाफ लगभग 60 दिन चलाए गए ऑपरेशन विजय की सफलता के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

    इतिहास के पन्नों को टटौले तो इस युद्ध की सफलता में बड़े स्तर पर भारतीय सेना के जवानों ने अपनी शहादत दी थी। उन्ही में से एक जवान भिवानी के जगत कॉलोनी निवासी शहीद कंवरपाल शेखावत है, जिन्होंने मात्र 28 वर्ष की आयु में 26 जून 1999 को आतंकवादियों से टाईगर हिल पर लड़ते हुए अपनी शहादत दी।

    सैकिंड राज राईफल में लॉस नायक पद पर रहते हुए जब कंवपाल शेखावत ने जब सेना के आदेशों पर दूसरी पर घुसपैठियों पर अटैक किया तो सामने से आतंकवादियों द्वारा गोला फेंका गया, जो उनकी गर्दन पर गिरा और फट गया। जिसके चलते वे शहीद हुए। उनका जन्म राजस्थान के झंझूनू जिले के बनगोठड़ी गांव में किसान बनवारी सिंह के घर हुआ था। उनकी माता मंगेज सिंह गृहणी है। वे अपने 8 भाई-बहनों में चौथे नंबर पर पैदा हुए थे। शहीद कंवरपाल सिंह शेखावत के चार अन्य भाई भी भारतीय सेना में राज राईफल में सैनिक है। कारगिल युद्ध के दौरान पांचों भाई इस युद्ध में शामिल हुए थे। उनके छठे भाई बीएसएफ में है। ऐसे में छओ भाई भारतीय सेना को अपनी सेवाएं दे रहे है।

    शहीद कंवरपाल शेखावत की पत्नी विदेश देवी व भाई पवन सिंह ने बताया कि शहीद कंवरपाल शेखावत ने अपनी शहादत देश के लिए दी, इस पर उन्हे गर्व है। सरकार द्वारा उन्हे भिवानी में पैट्रोल पंप दिया गया। इसके साथ ही राजस्थान सरकार द्वारा उन्हे 15 एकड़ जमीन भी उपलब्ध करवाई गई। इस सहायता के चलते शहीद कंवरपाल शेखावत के दोनों बच्चों को वे पढ़ा पाए। आज उनकी एक बेटा व एक बेटी स्नातक पास कर चुके है। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर शहीदों व उनके परिवारों को विभिन्न राष्ट्रीय पर्व पर सम्मान के लिए बुलाती है। वे यह भी सरकार से उम्मीद करते है कि कारगिल शहीदों की याद में प्रति वर्ष अलग से एक कार्यक्रम आयोजित कर उनकी शहादत को याद करने के लिए उन्हे बुलाए। सरकार द्वारा मिल रही सहायता को उन्होंने परिवार के लिए पर्याप्त भी बताया। Kargil Diwas

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