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Wednesday, February 18, 2026
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    सच्ची भावना से नजर आता है भगवान

    Anmol Vachan

    पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जहां एक मालिक, वाहेगुरु की चर्चा होती है, परमपिता परमात्मा से मिलने का ढंग सिखाया जाता है, (Meditation) बुरी से बुरी आदतें छूटती हैं और भगवान खुद विराजमान होते हैं, उसी का नाम सत्संग है। इन्सान भावना से याद करे तो वो जरूर नजर आएगा, जरूर अंदर से खुशी देंगे।

    सत्संग के क्षेत्र में साध-संगत सुबह-शाम राम-नाम, अल्लाह, मालिक की चर्चा सुनती है। वो बहुत ही पाक-पवित्र होता है। सत्संग में आकर अगर राक्षस, बुरे कर्म करने वाला तौबा कर ले, मालिक से जुड़ जाए तो जन्मों-जन्मों के पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है।

    दिमाग में विचारों का आना कोई बड़ी बात नहीं है | Meditation

    आप जी फरमाते हैं कि कोई इन्सान इसके उल्ट दुर्भावना लेकर आता है, दिमाग में बुरे विचार लेकर आता है या बुरे कर्म करता है। तो उसका हश्र बहुत ही बुरा होता है। दिमाग में विचारों का आना कोई बड़ी बात नहीं है, पर उस पर अमल करना बहुत बड़ी बात है। चाहे वो बुरे हो चाहे अच्छे। अच्छे कर्मों का दिमाग में आना और उस पर अमल करना बेमिसाल है। परमपिता परमात्मा को मिलाने वाली बात है। वहीं बुरे विचार आना और फिर उन पर अमल करने से इन्सान भयानक बीमारियों व दु:ख तकलीफों से घिर जाता है, जो कभी निकल नहीं पाता।

    गलती हो गई अनजाने में और इन्सान उसे मान
    लेता है, उसे इन्सान कहते हैं | Meditation

    आप जी फरमाते हैं कि गलती करके मान ले उसे इन्सान कहते हैं। गलती हो गई अनजाने में और इन्सान उसे मान लेता है, तौबा करता है, उसे इन्सान कहते हैं, लेकिन गलती पर गलती करे तो उसे हैवान, पशु कहते हैं। गलती पर गलती करता ही चला जाए तो उसे शैतान कहते हैं। उसका हशर फिर हद से ज्यादा बुरा होता है। उसको कहीं भी न दरगाह में, न इस जहान में टिकाव नहीं मिलता। अंदर से बेचैन, दर-दर की ठोकरें, तरह-तरह की बीमारियां, परेशानियां उसे घेर लेती हैं।

    पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान सच्चे दिल से साध-संगत के समक्ष तौबा करे तो वह दरगाह में जल्दी मंजूर होती है। कई सत्संग में पीछे जाकर खड़े हो जाते हैं और वहीं माफी ले लेते हैं कि कौन-सा किसी को पता चलता है। फिर वो परमात्मा पता लगाकर ही छोड़ता है। आप जी फरमाते हैं कि मालिक तो मालिक है उससे कोई चालाकी करेगा तो इतना तो वो भोला है नहींं।

    आप जी फरमाते हैं कि इन्सान सत्संग में पीर-फकीर के वचन सुने उस पर अमल कर ले तो जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं। दुर्भावना, सद्भावना हो जाती है, लेकिन अगर कोई बुरे विचार लेकर उस पर अमल करने लग जाए तो उसका हशर बहुत ही बुरा होता है।

     

     

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