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    सरस मेले पर चढ़ा करवाचौथ का रंग

    National Saras Fair

    महिलाओं ने आर्टिफिशियल ज्वैलरी, साड़ी, सूट व सौंदर्य प्रसाधनों की करी खरीदारी

    सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा
    गुरुग्राम। मौसम खुलते ही सेक्टर-29 के लेजरवैली ग्राउंड में लगे सरस मेले में रोनक लौटने लगी है। करवाचौथ की खरीदारी से राष्ट्रीय सरस आजीविका मेला (National Saras Fair) गुलजार हो उठा है। यहां 7 अक्टूबर से 23 अक्टूबर के बीच आयोजित किए जा रहे इस मेले में शुरूआती दौर में भले ही बारिश की वजह से रंग में भंग पड़ गया था, लेकिन मौसम साफ होते ही महिलाओं के इस पसंदीदा त्योहार के चलते सरस की खोई रौनक फिर से लौट आई है। करवाचौथ पर्व के एक दिन पूर्व मेला परिसर में महिलाओं की खूब भीड़ रही। महिलाओं ने यहां से ज्वैलरी, साड़़ी, सूट व मेकअप का सामान खरीदा।

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    फैशनेबल व डिजाइनर गहनों को वरीयता दी जा रही

    करवाचौथ के लिए हमारे पारंपरिक बाजारों में विशेष तैयारियां की जाती हैं, लेकिन गुरुग्राम में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय सरस आजीविका मेले की अवधि में करवाचौथ का त्यौहार भी शामिल है। ऐसे में देश के विभिन्न राज्यों से आई हमारी महिलाशक्ति द्वारा सरस मेले में भी खास तैयारियां की गयी हैं। आमतौर पर हमारे भारतीय रीति-रिवाजों में नारी श्रृंगार के लिए सोने अथवा चांदी के आभूषण पहनने का चलन है, लेकिन पिछले कुछ समय से आए पारंपरिक बदलावों के चलते महिलाओं की पसंद और चलन को देखते हुए बाजार में भी फैशनेबल व डिजाइनर गहनों को वरीयता दी जा रही है।

    डिजाइनर थाली भी महिलाओं को खूब लुभा रही

    हरियाणा राज्य आजीविका मिशन से दीप्ति ढींढसा के मुताबिक सरस मेले में गुरुग्राम के बाजारों से कम दाम पर मिल रहे पायल एवं बिच्छू, डिजाइनर चेन, डिजाइनर अंगूठी व नेकलेस महिलाओं की खासी पसंद बने हुए हैं। सुहागिनों के लिए बेहद खास इस त्यौहार को लेकर मेले में मिल रही डिजाइनर थाली भी महिलाओं को खूब लुभा रही है। लाल रंग के वेलवेट पेपर से सजी थाली में तांबे का लोटा, दीपक और धूप-अगरबत्ती स्टैंड बना हुआ है। इसके अलावा मिट्टी के करवे एवं दीयों को भी नया लुक दिया गया है।

    श्रृंगार है महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण

    महिलाओं के लिए श्रृंगार में चूड़ियों का विशेष महत्व है। चूड़ियों के प्रति आकर्षण तब अधिक बढ़ जाता है यदि वो लाख से बनी हो। यही कारण है कि सरस मेले में आई पर्यटक महिलाएं विभिन्न स्टाल पर जमकर इनकी खरीदारी कर रही है। विभिन्न राज्यों के स्टाल पर बिक रही चूड़ियों को ना सिर्फ अलग अलग रंग व रूप दिया गया है, बल्कि रेशमी धागों का उपयोग कर उन पर विभिन्न प्रकार की आकृतियां भी बनाई गई हैं। इसके अलावा साड़ियों के स्टाल पर बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल व राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों से आई विभिन्न महिलाओं के समूहों द्वारा टीम वर्क के साथ तैयार की गई बनारसी, जयपुर, कोलकाता व औरंगाबाद की साड़ियों की विशाल रेंज देखी जा सकती है। इसके साथ ही हमारी पारंपरिक कला यानी हैंड वर्क किए रेडीमेड सूट और लहंगे भी सहज ही उपलब्ध हैं।

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