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    तबाह ट्रेनें, बिखरी बोगियां, लाशों का अंबार! सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

    Odisha Train Accident
    ओडिशा ट्रेन हादसे की समयबद्ध जांच के लिए शीर्ष अदालत में याचिका

    ओडिशा ट्रेन हादसे की समयबद्ध जांच के लिए शीर्ष अदालत में याचिका

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। ओडिशा रेल हादसे (Odisha Train Accident) की समयबद्ध जांच उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले एक विशेषज्ञ आयोग से कराने का निर्देश देने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि यह दुर्घटना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार और नागरिकों की स्वतंत्रता के उल्लंघन के मद्देनजर उच्च अधिकारियों द्वारा की गई घोर लापरवाही को दर्शाती है। दो जून को हुए इस हादसे में 288 लोगों की मृत्यु और 1000 से अधिक लोगों के घायल हो गये हैं।

    दशकों में भारत में सबसे बड़े रेल हादसों में से एक | (Odisha Train Accident)

    शीर्ष अदालत के समक्ष दायर इस याचिका में भारतीय रेलवे प्रणाली की मौजूदा जोखिम और सुरक्षा मानकों का विश्लेषण और समीक्षा करके इसे मजबूत करने के लिए व्यवस्थित संशोधनों का सुझाव देने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई है। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा व्यवस्था (एटीपी) ‘कवच’ लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश भी मांग की है। ट्रेन संचालन की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में इस मत्वपूर्ण कदम की घोषणा रेल मंत्रालय ने 23 मार्च 2022 को की थी।

    तिवारी ने अपनी याचिका में कहा है कि उच्च अधिकारियों द्वारा बार-बार इस तरह (रेल हादसा) की अनियमित और लापरवाहीपूर्ण कार्रवाइयों के साथ ही सख्त न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता थी। याचिका में ओडिशा ट्रेन दुर्घटना में तीन ट्रेनों के दुर्घटनाग्रस्त होने से 288 से अधिक लोगों की मौत और 1000 से अधिक लोग घायल तथा इससे सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान होने का जिक्र है। याचिका में कहा गया है कि यह हादसा पिछले कुछ दशकों में भारत में सबसे बड़े रेल हादसों में से एक है।

    रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेकर वैष्णव का इस्तीफा लें मोदी : कांग्रेस

    कांग्रेस ने ओडिशा में हुई रेल दुर्घटना (Odisha Train Accident) को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पीड़ित परिजनों के प्रति रविवार को संवेदना व्यक्त की और कहा कि इस दुघर्टना में करीब 300 निर्दोष यात्री मारे गए हैं, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव का इस्तीफा लेना चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा तथा पार्टी के राज्य सभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहले बड़ी रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री, माधवराव सिंधिया तथा नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दिया था और इस बार श्री मोदी को नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर रेल मंत्री से इस्तीफा मांगना चाहिए।

    उन्होंने कहा, “इस्तीफा देने का मतलब है नैतिक जिम्मेदारी लेना। इस सरकार में न जिम्मेदारी दिखती है, न नैतिकता।प्रधानमंत्री जी, ये देश उम्मीद करता है कि जिस तरह लाल बहदुर शास्त्री जी, नीतीश कुमार जी, माधव राव सिंधिया जी ने इस्तीफा दिया था… उस तरह आप भी अपने रेल मंत्री का इस्तीफा लें।” कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार में रेलवे ट्रैक की मरम्मत और उनके नवीनीकरण का बजट हर साल कम होता जा रहा है। यही नहीं जो बजट है उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कैग की रिपोर्ट बताती है कि 2017 से 2021 के बीच ट्रेनों के पटरी से उतरने की कुल 1,127 घटनाएं हुई हैं।

    केंद्र सरकार पर रेलवे को खोखला करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘ ‘हम हाई-स्पीड ट्रेन के खिलाफ नहीं हैं लेकिन 10-15 चमकती ट्रेन दिखाकर आप पूरा ढांचा खोखला कर देंगे, ये मंजूर नहीं है। आप रेल मंत्री के ट्विटर टाइमलाइन पर जाएंगे तो रेलवे की हकीकत दिख जाएगी। रेल विभाग में 3.12 लाख पद खाली हैं। नौ फरवरी को रेल मंत्रालय में सकुर्लेट हुई आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया था कि सिग्नल इंटरलॉकिंग सिस्टम में खामी है। ये सही नहीं हुई तो हादसे होते रहेंगे। सवाल है कि इस रिपोर्ट को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री सदी के सबसे भयावह रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेकर रेल मंत्री का इस्तीफा लेंगे। संसद की स्थाई समिति की इस संबंध में आई रिपोर्ट पर प्रधनमंत्री की तरफ से कौन जवाब देगा।

    उन्होंने कहा,‘आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार में रेलवे सुरक्षा के लिए अलग इंजीनियर्स की टीम होती थी, जो रेलवे ट्रैक की सुरक्षा और उनकी मरम्मत का काम देखती थी। आजादी के बाद हमारी सरकारों ने तय किया कि रेलवे अपना मुनाफा देखेगा। ऐसे में यात्री तथा रेलवे सुरक्षा की चिंता करते हुए अलग से रेलवे सुरक्षा आयोग बनाया था जिसे नागरिक उड्डयन के अंतर्गत रखा गया था। रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड की यह कहते हुए आलोचना की गई थी कि वह रेलवे सुरक्षा आयोग की सिफारिशों पर ध्यान नहीं दे रहा था।

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