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Sunday, March 1, 2026
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    महापरोपकार माह के उपलक्ष्य में कविता

    LIVE Mahapropkar Diwas

    नाच रहा ये जहां ..
    डालू जिधर नजर रहमतों के भंडार खुले हैं ,
    होकर खुशियों में बावले
    आज हम अपने को भूले हैं ।
    हमारी किस्मत बनाई ,
    की तुम्हें पाकर धन्य हुए ।
    आज चली महकती पुरवाई ,
    जो हर दिल को छुए ।
    नाच रहा है ये जहां ,
    हलचल है दसों दिशाओं में ।
    नीर प्रेम का बहे ,
    वैराग्य है भावनाओं में ।
    उतर आया हो चांद धरा पर ,
    ऐसा प्रकाश है सब ओर ,
    आगमन में खुदा के ,
    स्वागत कर रही है भोर ।
    हजूर को पहना कर हार ,
    शाह – सतनाम जी ने सौंपी संगत की जिम्मेवारी ।
    जीव को काल से छुड़ाने ,
    दी दोनों जहां की नंबरदारी ।
    इंसानियत बचाने हेतु ,
    सतगुरु बनकर आए हैं जवान ।
    डेरा सच्चा सौदा की राह पर चलके ,
    हषार्या ये जहान ।
    जिसने खुदा माना ,
    लूट रहे हैं वो नजारे ।
    करते सेवा जो ,
    खुशियां नाचे उनके द्वारे ,
    भटके न कभी राह से ,
    तू रखना हरदम अपने पास ।
    सूरत हो आपकी ही दिल में ,
    बस इतनी सी कहूं बात ।।

    – कुलदीप स्वतंत्र

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