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    प्रो. डॉ. रंजू ग्रोवर महिलाओं के लिए प्रेरणा, माता-पिता के लिए नाज

    Dr. Ranju Grover sachkahoon

    सच कहूँ/सन्नी कथूरिया, पानीपत। पिता पुत्री के निस्वार्थ और निश्छल प्रेम की तुलना किसी चीज से नहीं की जा सकती। हर बेटी की कामयाबी के पीछे कहीं ना कहीं उसके पिता का त्याग व समर्पण ही होता है। एक वो दौर जब बेटियों की शिक्षा को इतनी तवज्जो नहीं दी जाती थी, और वह भी कंप्यूटर शिक्षा, उसकी भारी भरकम फीस, जिसके लिए एक मध्यमवर्गीय पिता तो कतई जद्दोजहद नहीं कर सकता था। बावजूद इसके एक संयुक्त परिवार और उसमें भी चार बेटियों को एक पिता ने न केवल शिक्षित किया बल्कि उनका भविष्य उज्जवल बना दिया। अलबत्ता आज कंप्यूटर ज्ञान में महारत हासिल डॉ. रंजू ग्रोवर द्वारा हजारों विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल बन रहा है। जी हां शहर के प्रतिष्ठित आईबी कॉलेज की कंप्यूटर विभाग की एचओडी असिस्टेंट प्रो. डॉ रंजू ग्रोवर महिलाओं के लिए प्रेरणा है तो माता पिता के लिए नाज।

    उपयोग करें… दुरुपयोग नहीं

    बच्चों के लिए डॉ रंजू कहती है कि कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट का हमें यूज करना है मिसयूज नहीं। पहले के टाइम में मनोरंजन का जरिया सिर्फ टीवी होता है था। वह भी लिमिटेड टाइम के लिए। उसमें सीरियल, न्यूज, कार्टून्स की टाइमिंग फिक्स होती थी और बच्चे पढ़ भी लेते थे और ज्यादा खेलते भी थे। वह बताती हैं कि बैडमिंटन और क्रिकेट उनका पसंदीदा खेल रहा है। आज बच्चे पढ़ाई कम और मोबाइल ज्यादा यूज करते हैं।

    पिता चन्द्रभान बने प्रेरणा

    डॉ. रंजू ग्रोवर का जन्म वर्ष 1978 में करनाल के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। पिता स्व. चन्द्रभान सेना के मेजर पद से रिटायर्ड थे, जबकि माता गृहणी है। डॉ. रंजू ने बताया कि उनके दादा जी सरदार चरनजीत सिंह पाकिस्तान के पेशावर में रहते थे। वर्ष 1947 में हिंदुस्तान पाकिस्तान बंटवारे के दौरान उनके दादा जी की मौत हो गई थी। उनके दादा जी बहू-बेटियों की शिक्षा पर बहुत जोर देते थे, उनकी दादी रावल कौर डॉक्टर थी, लेकिन दादा के होते कभी नौकरी नहीं की।

    जब वक्त की गर्दिश ने सब कुछ बदल दिया और वह करनाल आकर बसे तो मजबूरी वश उनकी दादी को परिवार संभालने के लिए करनाल जेल में बतौर डॉ अपनी सेवाएं देनी शुरू करनी पड़ी। उनके पिता चन्द्रभान को पढ़ने का शौक था, इसलिए अपने दोस्त से पैसे लेकर शहर छोड़कर पढ़ने के लिए चले गए। इसी दौरान उनका आर्मी में चयन हो गया, जिसके साथ साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और संयुक्त परिवार को भी संभाला। अपने पिता से ही प्रेरित होकर डॉ रंजू ने अपने जीवन को इतना काबिल बनाया। डॉ रंजू के पिता अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनको अपनी बेटी पर हमेशा फक्र रहा।

    डॉ. रंजू की उपलब्धियां

    डॉ. रंजू ने एमएससी कंप्यूटर साइंस, एमटेक, एम फिल, पीएचडी इन कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की हैं। एम फिल व पीएचडी की डिग्री डॉ रंजू ने शादी के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुए हासिल की, जो काबिलेतारिफ है। वह 17 वर्षों से आईबी कॉलेज पानीपत बतौर कंप्यूटर प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रही हैं। आर्मी ऑफिसर की बेटी होने के नाते मेहनत उनकी रग-रग में समाई है, इसलिए वो अपनी लगन व अथक मेहनत के गुण की बदौलत कॉलेज की बहुत सी जिम्मेदारियां एक साथ निभा रही हैं। कॉलेज के सभी ऑनलाइन सिस्टम,ऑनलाइन स्कॉलरशिप, ऑनलाइन एग्जामिनेशन सिस्टम, ऑनलाइन एसेसमेंट, प्रैक्टिकल सिस्टम और भी काफी सारे चार्ज संभाले हुए साथ ही एडमिशन नोडल अधिकारी भी हैं।

    अवार्ड व सम्मान

    डॉ. रंजू की 8 किताबें छप चुकी हैं जो कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की सिलेब्स अनुसार है। उनकी एक पुस्तक इंडिपेंडेंट है और बाकी 7 पुस्तकें को-ओथर के साथ हैं। डॉ .रंजू के 7 इंटरनेशनल व 8 नेशनल पेपर पब्लिश हुए हैं। आईबी कॉलेज की तरफ से वर्ष 2017-18 व 2018-19 में उनके बेस्ट एम्पलाई के अवार्ड से नवाजा गया। इंटरनेशनल एजुकेशन अवार्ड -2019 के तहत इन्हे काइट्स द्वारा इनोवेटिव प्रोफेसर के अवार्ड से सम्मानित किया गया और काइट्स द्वारा ही 2020 में कंट्रीब्यूशन ऑफ एजुकेशन कम्युनिटी से सम्मानित किया गया।

    वर्ष 2020 में ही आरपीआईआईटी ने एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें बेस्ट फीमेल इन कंप्यूटर साइंस के खिताब से सुशोभित किया। एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड -2020 के तहत बेस्ट टीचर ऑफ द ईयर से सम्मानित हुई। वर्ष-2021 शिक्षक दिवस पर बेस्ट प्रोफेसर के सम्मान से सम्मानित किया गया। डॉ. रंजू ने गरीब बच्चों के लिए एक लाइब्रेरी बनाई हुई है, जिसमें वह जरूरतमंद बच्चों के लिए कंप्यूटर की किताबें उपलब्ध करवाती हैं।

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