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Thursday, March 12, 2026
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    ब्लॉक बठिंडा की साध-संगत ने मनाई खुशियां, बांटी मिठाईयां

    सच कहूँ/सुखनाम
    बठिंडा। जैसे ही ‘सच-कहूँ’ के सोशल मीडिया चैनल के जरिये साध-संगत को पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) में शुभ आगमन की सूचना पाने के लिए साध-संगत अपने मोबाईलों पर निगाहें टिकाए बैठी रही। जैसे ही पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां अपने यू-ट्यूब चैनल पर लाईव हुए तो साध-संगत के तड़पते दिलों को मानों जैैसे ठंडक सी मिल गई। पूज्य गुरू जी के शुभ आगमन पर देश-विदेशों की साध-संगत अलग-अलग तरह से अपनी खुशियों का इजहार कर रही है। ब्लॉक बठिंडा की साध-संगत भी खुशी से फूले नहीं समा रही। साध-संगत द्वारा अपने-अपने तरीकों से खुशी मनाई जा रही है, कहीं देसी घी के दिये जलाए जा रहे हैं, कहीं केक काटे जा रहे हैं, कहीं नामचर्चाएं कर गुरूयश गाया जा रहा है तो कहीं साध-संगत सिमरन कर रही है। साध-संगत में भारी खुशी पाई जा रही है। ब्लॉक बठिंडा की शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग की सेवादार बहनें आज सुबह पूज्य गुरू जी दर्शन करते ही अपनी खुशी को और चार चांद लगाने पहुंची बठिंडा के मलोट रोड पर पुल के नीचे बनी झुग्गी-झोपड़ियों में, जहां इन सेवादार बहनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर नाच-गाकर खुशी सांझी की और ढोल की थाप पर सेवादार बहनों ने पूज्य गुरू जी के बरनावा आश्रम में पधारने पर स्वागत किया। इसके बाद सेवादार बहनों ने बच्चों को मिठाईयां बांटी।

    ढोल की थाप पर नाच गाकर सेवादारों ने मचाई धमाल

    इस मौके सेवादार बहन नीतू इन्सां ने कहा कि पूज्य गुरू जी आज हमारे बीच पधारे हैं। सारी साध-संगत के लिए यह बहुत बड़ा दिन है। साध-संगत पूज्य गुरू जी के दर्शनों के लिए बहुत तड़प रही थी, सो आज का दिन तो बहुत ही भागों वाला है, कि हमारे प्यारे सतगुरू जी ने हमें दर्शन दिए हैं। भंगीदास बहन सपना इन्सां ने कहा कि भले ही दीवाली को अभी लगभग 10 दिन शेष हैं परंतु पूज्य गुरू जी के दर्शन कर हमारी तो आज ही दीवाली बन गई है। उन्होंने कहा कि एक मुरीद के लिए सतगुरू के दर्शनों से बढ़कर और कुछ भी नहीं। हमारे तो सभी त्यौहार प्यारे सतगुरू जी के ही साथ हैं। उन्होंने कहा कि सोहणे मुर्शिद का दर्श-दीदार कर रूह को जो सुकून मिला है, उसका लिख बोल कर वर्णन नहीं किया जा सकता। हम तो बार-बार पूज्य गुरू जी का शुक्राना ही कर सकते हैं, जिन्होंने रूहों की तड़प को देखते देह रूप में दर्शन देकर हमारी प्यास बुझाई है। पूज्य गुरू जी ने जो लाईव आकर वचन फरमाए हैं। हम उन पावन वचनों पर शत्-प्रतिशत अमल करेंगे और मानवता भलाई के कार्यों को और भी तेजी से करेंगे।

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