पूज्य गुरु जी ने बताया सेवा का मतलब, इस वीडियों को ध्यान से सूनें

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बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सच्चे दाता ने, बेपरवाह जी ने आज जो पूरी दुनिया में राम-नाम की चर्चा हो रही है, परम पिता परमात्मा को पाने की चर्चा हो रही है, सच्चे दाता ने ऐसी अलख जगाई कि आज वो घर जो कभी नरक की मानिंद हुआ करते थे, आज स्वर्ग जैसे बन गए हैं। वो इन्सान जो शैतान या यूं कह लीजिये हैवान से भी गिर गए थे, आज बहुत ही बढ़िया इन्सान बन गए हैं।

इस दुनिया में जीना हर किसी ने है, समय निश्चित है और हर कोई अपना काम कर रहा है। लेकिन जीने, जीने में बहुत फर्क होता है। सन्त, पीर-फकीर इस धरती पर आते हैं, ताकि परमपिता परमात्मा की औलाद का जीवन सुखमय हो सके और बाकी इन्सान दुनिया में आते हैं, उसका और उसके परिवार का जीवन सुखमय हो सके। जमीन-आसमान का फर्क होता है। सन्त कभी किसी से भेदभाव नहीं करते। सन्त कभी किसी का बुरा नहीं सोचते, करना तो बहुत दूर की बात होती है।

सेवा होती है जो सच्चे दिल से की जाए और बेगर्ज की जाए

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि बेपरवाह जी ने वचन फरमाये हमेशा सबका भला सोचा, सबका भला करो और जितना हो सके सेवा करो। आज आदमी आज का दिन बड़ा अजीब हो चुका है, आज आदमी खुदगर्ज हो गया है। नाटकबाज हो गया है। स्वार्थी हो गया है। बेपरवाह जी के साथ हम शायद नवंबर में 90 में या दिसंबर में घूम रहे थे तो एक जगह पे वो बैठे और फरमाया कि जो दिन गुजर गया शुक्र मनाओ बढ़िया है आने वाला दिन इससे भी बुरा है। दिन अगर बूरे का मतलब निकाले दिन बुरे का मतलब ये नहीं दिन, त्यौहान बुरा हो जाएगा। आदमी की फितरत गंदी होती जा रही है। आज आदमी सेवा भी करना चाहता है और इच्छा ये रखता है कि माया रानी कितनी मिलेगी। ये सेवा नहीं होती। सेवा होती है जो सच्चे दिल से की जाए और बेगर्ज की जाए।

आइयें सुनते है पूज्य गुरु जी के वचन….

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