हमसे जुड़े

Follow us

22.1 C
Chandigarh
Wednesday, February 18, 2026
More
    Home फीचर्स साहित्य कैसे ना देखे ...

    कैसे ना देखे बार-बार नुरानी मुखड़े को…

    तूने अपने हुश्न पर पहरा लगा रखा है।
    रूहों को ब्याहने आया है सेहरा लगा रखा है।

    msg
    कैसे ना देखे बार-बार शक्ल तुम्हारी को…
    इलाही सूरत पर इन्सानी चेहरा लगा रखा है।


    दर्द-ए-दिल की दवा भी पास तुम्हारे है।
    और तुमने ही ये घाव गहरा लगा रखा है।

    msg-bhandra

    मेरे और तेरे दरमियां दीवार बने हैं जो
    ‘बघियाड़’ चीख ले खूब शख्स हर भहरा लगा रखा है।

    संजय बघियाड़

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here