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    सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका खारिज

    Satyendar Jain

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। राष्ट्रीय राजधानी की एक विशेष अदालत ने कथित धनशोधन मामले में गिरफ्तार दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका शनिवार को खारिज कर दी। आय से अधिक संपत्ति से संबंधित धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के उल्लंघन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 मई को जैन को गिरफ्तार किया था। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) गीतांजलि गोयल ने 13 जून को ईडी की ओर से दलीलें सुनने के बाद जैन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश पारित किया था।

    इसके ठीक अगले दिन 14 जून को जमानत याचिका पर दलीलें सुनने के बाद आदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। ईडी ने कहा है कि उसने राम प्रकाश ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों अंकुश जैन, वैभव जैन, नवीन जैन और सिद्धार्थ जैन, प्रूडेंस ग्रुप आॅफ स्कूल्स चलाने वाले लाला शेर सिंह जीवन विज्ञान ट्रस्ट के अध्यक्ष जी.एस. मथारू, राम प्रकाश ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक एवं अंकुश जैन के ससुर योगेश कुमार जैन तथा लाला शेर सिंह जीवन विज्ञान ट्रस्ट के परिसरों पर छापे मारे। साथ ही विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए।

    क्या है मामला

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 2017 में जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन, अजीत प्रसाद जैन, सुनील कुमार जैन, वैभव जैन और अंकुश जैन के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद ईडी ने धनशोधन की जांच शुरू की थी। सीबीआई ने तीन दिसंबर, 2018 को जैन, उनकी पत्नी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जैन ने 14 फरवरी, 2015 और 31 मई, 2017 के दौरान दिल्ली सरकार में मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उस दौरान जैन की संपत्ति जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में नहीं थी। ईडी ने गत 31 मार्च को पहले जैन के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनियों से संबंधित 4.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क किया था तथा 30 मई को जैन को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था।

    जमानत याचिका के दौरान जैन के वकील ने कहा कि उनके देश को छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं और सबूत से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि जैन जांच एजेंसी के साथ सहयोग कर रहे हैं और अनुरोध किया कि आप नेता स्लीप एपनिया से पीड़ित हैं, इसलिए चिकित्सा आधार पर जमानत दी जा सकती है। ईडी ने जमानत याचिका के इस आधार पर विरोध किया कि जांच अभी चल रही है और यदि जैन को इस स्तर पर रिहा किया गया तो सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। ईडी ने यह भी कहा कि जैन जांच के दौरान टाल-मटोल कर रहे थे। न्यायाधीश गोयल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।

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