हमसे जुड़े

Follow us

19.3 C
Chandigarh
Sunday, March 1, 2026
More
    Home आध्यात्मिक अनमोल वचन मेमनों के बहा...

    मेमनों के बहाने पोते बख्शे

    Shah Mastana ji Mahara
    Shah Mastana ji Maharaj: डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक पूज्य बेपरवाह साई शाह मस्ताना जी महाराज के 133वें पावन अवतार दिवस पर विशेष

    गुरू सत ब्रह्मचारी सेवादार मक्खन सिंह ने बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के एक अलौकिक करिश्मे का वर्णन करते हुए बताया कि हम तीन भाई थे। मैं और खिल्लन सिंह (भाई) तो ज्यादा समय डेरा सच्चा सौदा में ही बिताते व सेवा करते थे। छोटा भाई मल्ल सिंह घर का कारोबार भी करता व डेरा सच्चा सौदा में सेवा भी करता था। सन् 1958 में एक दिन शहनशाह मस्ताना जी महाराज डेरा सच्चा सौदा चोरमार में पधारे हुए थे। साध-संगत बहुत ही दूर-दूर से आई हुई थी। शहनशाह जी ने सत्संग पर बेशुमार दातें बांटीं। दाता जी ने किसी को सोने की मोहरें, किसी को भैंस, किसी को गाय, किसी को बकरियां दी। अंतर्यामी सतगुरू जी ने मुझसे (गुरू सत ब्रह्मचारी सेवादार मक्खन सिंह) पूछा, ‘‘भाई! तू की लैणा है?’’ मैंने कहा कि जी! जो मर्जी दे दो। शहनशाह जी ने मुझे दो छोटे-छोटे मेमनें दे दिए। मैं यह इलाही दात प्राप्त करके बहुत खुश हुआ और खुशी-खुशी मेमनों समेत घर पहुंच गया।

    यह भी पढ़ें:– Saint Dr. MSG on Instagram : आपका वो है जो सारी दुनिया का मालिक है : पूज्य गुरु जी

    जब मैं अपने घर पहुँचा तो मेरी माँ मुझसे नाराज हो गई व कहने लगी कि हमने इन मेमनों का क्या करना हैै? मेरी माता जी अगले दिन गुस्से में सच्चा सौदा चोरमार चली गई और दयालु सतगुरू जी के चरणों में अर्ज की कि सांई जी! लोग मज़ाक करते हैं कि जैसे वे सभी भाई खुद कुंवारे थे वैसे ही बाबा जी ने मेमनें दे दिए हैं। सतगुरू जी ने वचन फरमाया, ‘‘भाई ! तू ऐह नहीं मँगदी कि मेरे पोते होण इन मेमनों को न किसी को देना है, न ही इन्हें रेवड़ में छोड़ना है, इनकी घर में ही सेवा करनी है। जब ये शरीर छोड़ जाएँगे तो ये तुम्हारे घर जन्म लेंगे।’’ मेरी माता दयालु दातार जी के वचन सुनकर बहुत खुश हुई और खुशी-खुशी घर लौट आई। उस समय हम तीनों भाई कुंवारे थे तो मेरी माता को उम्मीद हो गई कि मेरे पोते होंगे। अब मेरी माँ उन मेमनों की खूब सेवा करती। मैं और खिल्लन सिंह तो डेरा सच्चा सौदा में ही सेवा करते थे। हम दोनों भाईयों ने विवाह करवाने का ख्याल छोड़ दिया। इसके बाद मल्ल सिंह ने शादी कर ली। फिर सन् 1975 में बड़ा मेमना मर गया और करीब एक साल बाद मल्ल सिंह के घर लड़के ने जन्म लिया। सन् 1977 में छोटा मेमना मर गया और साल बाद एक और लड़के ने जन्म लिया।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here