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Tuesday, March 3, 2026
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    US-Iran Conflict: यूएस-ईरान संघर्ष में 6अमेरिकी सैनिक मारे गए

    US-Iran Conflict

    US Military Operation:वॉशिंगटन। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर सूचित किया है कि ईरान के विरुद्ध संचालित व्यापक सैन्य अभियान के दौरान छह अमेरिकी सैनिकों का निधन हुआ है। कमांड के अनुसार 2 मार्च से जारी संघर्ष के क्रम में ये क्षति हुई। हाल ही में दो ऐसे सैनिकों के अवशेष भी प्राप्त किए गए हैं, जिनके संबंध में पूर्व में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी।कमांड ने बताया कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नामक यह सैन्य अभियान राष्ट्रपति के निर्देश पर 28 फरवरी को प्रातः 1:15 बजे आरंभ किया गया। अभियान कमांड के उत्तरदायित्व क्षेत्र में संचालित हो रहा है तथा इसके लक्ष्य ईरान स्थित सैन्य प्रतिष्ठान हैं। शहीद सैनिकों की पहचान उनके परिजनों को सूचित करने के 24 घंटे पश्चात सार्वजनिक की जाएगी। US-Iran Conflict

    प्रारंभिक 48 घंटों में 1250 से अधिक लक्ष्यों पर प्रहार किए गए

    जारी तथ्य-पत्र के अनुसार, प्रारंभिक 48 घंटों में 1250 से अधिक लक्ष्यों पर प्रहार किए गए। अभियान में बी-1 एवं बी-2 बमवर्षक, एफ-15, एफ-16, एफ-18, एफ-22 और एफ-35 लड़ाकू विमान, ए-10 आक्रमण विमान, पैट्रियट एवं थाड मिसाइल प्रणाली, परमाणु ऊर्जा चालित विमानवाहक पोत, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक तथा एमक्यू-9 रीपर जैसे आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। हमलों के लक्ष्यों में कमांड एवं नियंत्रण केंद्र, आईआरजीसी के संयुक्त मुख्यालय, एयरोस्पेस बलों के ठिकाने, समेकित वायु रक्षा प्रणाली, बैलिस्टिक मिसाइल स्थलों, नौसैनिक पोतों और पनडुब्बियों को सम्मिलित बताया गया है। कमांड के अनुसार एफ/ए-18 के अनेक स्क्वाड्रन निरंतर अभियान में सहयोग दे रहे हैं तथा वायुसेना के विमान दिन-रात सक्रिय हैं।

    अमेरिकी पक्ष ने दावा किया है कि वर्तमान में ओमान की खाड़ी में ईरान की कोई नौसैनिक उपस्थिति नहीं है। दो दिन पूर्व तक वहाँ ईरानी पोतों की संख्या उल्लेखनीय थी, किंतु अब वे क्षेत्र से हट चुके हैं। ओमान की खाड़ी सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो अरब सागर को होर्मुज जलडमरूमध्य से जोड़ती है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा भाग इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। किसी भी प्रकार की अवरोधक स्थिति अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है, जिसका प्रभाव भारत सहित अनेक आयातक देशों पर पड़ता है। US-Iran Conflict