102वें पावन अवतार दिवस पर विशेष : नूर से भरपूर नूरानी चेहरा,अनामी से आया ‘शाह सतनाम जी’ मेरा
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जम्मू-कश्मीर (सच कहूँ न्य...
सेवा-सुमिरन को गहना बना लो
जो लोग सेवा-सुमिरन को गहने बना लेते हैं, अमल करते हैं, मालिक उन पर अपनी दया-मेहर जरूर करता है। इस घोर कलियुग में सेवा करना बड़ा ही मुश्किल है। कोई भागों वाले जीव होते हैं जो सेवा करते हैं। सेवा के साथ-साथ सुमिरन, भक्ति-इबादत की जाए तो किसी भी चीज की कमी नहीं रहती।


























