Param Pita Shah Satnam Ji: पौधे पेड़ बनने से पहले ही साध-संगत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि…
सन् 1970 की बात है। ‘शाह ...
विषय-विकारों में फंसा व्यक्ति सदैव दुखी रहता है: पूज्य गुरु जी
यह कलयुगी संसार एक जलते, बलते भट्ठे के समान है। काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार व मन-माया ऐसी आग हैं, जिसके भी अंदर यह सुलगती है वह इन्सान कभी चैन नहीं ले सकता।


























