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    पूज्य गुरु जी के आगमन की खुशी में तरसेम व नंद सैनी ने लगाए छायादार पौधे

    Saint Dr. MSG

    तरसेम व नंद सैनी ने अपने खेतों में लगाए छायादार पौधे

    • पर्यावरण बचाने का दिया संदेश
    • तरसेम व नंद सैनी ने अपने खेतों में लगाए छायादार पौधे
    • पर्यावरण बचाने का दिया संदेश

    रतिया(सच कहूँ/शामवीर)। एक दशक पूर्व खेतों में जिस तरफ नजर दौड़ती थी हरे-भरे पेड़ नजर आ ही जाते थे। समझदार किसान अपने हाथों से खेतों में हरियाली सजाते थे। खेत की मेड़ पगडंडी के रूप में आवागमन काम तो आती ही थी। जिससे खेतों में काम करने के दौरान इन्हीं पेड़ की सुकून भरी छाया में भोजन के बाद दोपहर में हल्की नींद भी ले लेते थे। इन पेड़ों पर पक्षियों का बसेरा भी रहता था। जो फसलों में लगने वाले कीट-पतंगों से रक्षा करते थे। फसलों को नुक्सान करने वाले कीटाणु सबसे पहले मेड़ के पेड़ पर ही बैठते हैं। उन पेड़ों पर दवाओं का छिड़काव कर दिया जाए तो फसलों पर छिड़काव करने से बचत हो सकती है।

    समय बदलने के साथ खेती के तौर तरीके बदलते जा रहे हैं। किसान के मन में कुछ लालच आने लगा मेड़ को काटकर खेत को और बड़ा करने के चलते कई किसानों ने पेड़ काट दिए। लेकिन भूमि के संरक्षण के साथ खेतों की हरियाली नष्ट होती जा रही है। जिससे पर्यावरण को नुक्सान हो रहा है। वहीं डेरा सच्चा सौदा के पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के यूपी आगमन की खुशी में सच कहूँ संवाददाता तरसेम सैनी व उनके भाई फतेहाबाद जिला प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक समिति शाखा रतिया के क्लर्क नंद सैनी ने अपने खेत में छायादार पौधे लगाए।

    वही तरसेम सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के वचनों का अनुसरण करते हुए जहां डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु नेक भलाई के कार्यों में लगे हुए हैं, वहीं पूज्य गुरु जी दोबारा उन्हें यह संदेश दिया है कि हमें समय-समय पर पेड़-पौधे लगाने चाहिए व उनकी सार संभाल भी करनी चाहिए। इसी कड़ी में दोनों भाइयों ने अपने खेत में तीन छायादार पौधे लगाए।

    किसान अपने खेतों में लगाएं पेड़, होगा भूमि संरक्षण

    पर्यावरण प्रेमी नंद सिंह का कहना है कि पूर्व में किसान पर्यावरण के जितने प्रेमी थे। अब कम होते जा रहे हैं। किसानों के थोड़े से श्रम से हरियाली को बढ़ावा मिला हुआ था। हर तरफ छायादार फलदार पेड़ लगाए गए थे। जो धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बागानों की हरियाली तो होती ही थी। साथ ही हर खेत पर उसके चारों ओर छायादार वृक्ष शोभा बढ़ाते नजर आते थे। खेतों की मुड़ेरों पर और पगडंडियों के सहारे लगे पेड़ धीरे-धीरे कटते जा रहे हैं। किसान अपने खेतों पर ज्यादा नहीं कुछ पेड़ लगाएं तो पर्यावरण के साथ भूमि संरक्षण भी होगा। उन्होंने कहा कि सही दिशा और सही कोण में मेड़ पर पेड़ लगाने से फायदा ही है। गौरतलब है कि पर्यावरण प्रेमी नंद सिंह यहां अपने बैंक में ड्यूटी खत्म होने के बाद शहर के बुढ़लाडा रोड स्थित शहीद रविंद्र सिंह पार्क में पेड़-पौधों की पिछले काफी समय से देखरेख करते आ रहे हैं। उनका का पेड़ पौधों से काफी लगाव है।

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