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Sunday, March 1, 2026
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    हरियाणा-पंजाब विधानसभा के बीच बनेगा अस्थाई बॉर्डर

    Border

     सुरक्षा को लेकर कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहते हरियाणा विधानसभा स्पीकर

    •  रहेगा सुरक्षाकर्मियों का सख्त पहरा

    •  पुलिस अधिकारियों की 6 सदस्यीय उच्च कमेटी बनी, रोजाना होगा सुरक्षा की समीक्षा

    अश्वनी चावला
    चंडीगढ़। आजादी के पश्चात पहली बार हरियाणा और पंजाब के विधानसभा कंपलेक्स में लाइन आॅफ कंट्रोल दिखाई देगी और इसी पर एक अस्थाई बॉर्डर बनाया जाएगा। इस लाइन को पंजाब का आम व्यक्ति तो दूर विधायक या मंत्री भी पार नहीं कर पाएगा। अगर ऐसा करने की कोई भी हिमाकत करेगा तो उसे तुरंत गिरफ्तार करते हुए पुलिस थाने की सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता सुरक्षा को लेकर इस बार कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं, जिसके लिए उन्होंने दोनों राज्यों की एक विधानसभा के बीच में एलओसी बनाने तक के आदेश जारी करते हैं। हालांकि यह बॉर्डर अस्थाई रूप से बनाया जाएगा और हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र खत्म होने के पश्चात इसे हटा दिया जाएगा। परंतु जब जब हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र होगा, तब तब इस तरह की एलओसी तैयार करते हुए दोनों राज्यों के बीच में एक बड़ी लकीर खींची जाएगी, जिसे कोई भी पार नहीं कर पाएगा।

    सोमवार को सुरक्षा समीक्षा को लेकर ज्ञान चंद गुप्ता ने हरियाणा विधानसभा के कंपलेक्स में एक हाई लेवल मीटिंग करते हुए यह आदेश जारी किए हैं। इस बैठक में हरियाणा के एडिशनल चीफ सेक्टरी गृह विभाग राजीव अरोड़ा, एडिशनल डीजीपी के साथ-साथ चंडीगढ़ के गृह सचिव डिप्टी कमिश्नर के सहित पंजाब विधानसभा के सेक्रेटरी भी मौजूद रहे। इसके साथ हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ के अधिकारियों के एक सदस्य उच्च कमेटी का गठन कर दिया है, जो कि विधानसभा सत्र के दौरान किसी भी तरह की सुरक्षा में चूक ना हो, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए रोजाना मीटिंग तक करेगी।

    सीएम खट्टर को घेर बैठे थे अकाली विधायक

    पिछले सत्र में किसान आंदोलन के चलते अकाली विधायकों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का विधानसभा सत्र के दौरान घिराव कर लिया था। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के हाथ पैर की पड़ गई थी, क्योंकि विधानसभा कंपलेक्स के अंदर किसी को भी आने या प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं रहती है। परंतु पंजाब विधानसभा का सत्र भी समांतर चलने के चलते अकाली दल के विधायक पहले से वहां मौजूद थे और उन्होंने पूरी प्लानिंग के तहत मनोहर लाल खट्टर को घेरने की कोशिश की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को वहां से निकाला था।

    नाराज स्पीकर ने तलब की थी रिपोर्ट

    मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का घेराव करने की कोशिश के पश्चात स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता काफी ज्यादा नाराज हो गए थे, जिस कारण उनके आदेशों पर अकाली विधायकों के खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दर्ज करवाई गई थी। ऐसे में स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता की तरफ से पूरे मामले की रिपोर्ट भी मांगी गई थी, ताकि उस समय सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा सके। क्योंकि वो समय रहते घेराव को रोक नहीं पाए थे।

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