भूकंप से कांपे असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिया जायजा

गंगटोक (एजेंसी)। सिक्किम में नेपाल से सटी सीमा के पास भूकंप के मध्यम दर्जे के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.4 मापी गई। भूकंप के झटके असम, बिहार और पश्चिम बंगाल के अलावा सिक्किम से सटे भूटान के सीमावर्ती कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। बिहार की राजधानी पटना में दो से तीन सैकिंड तक लोगों को झटके महसूस हुए। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूकंप के झटके से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया।

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने कहा कि सिक्किम-नेपाल सीमा पर रात आठ बजकर 49 मिनट पर 5.4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये। इससे पहले फरवरी में सिक्किम में युक्सोम के पास रिक्टर पैमाने पर 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप के कारण किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है लेकिन इसके कारण विभिन्न स्थानों पर ठहरे पर्यटक दहशत के मारे सड़कों पर निकल आये। भूकंप का केंद्र पूर्वी गंगटोक में जमीन की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। एक मिनट के भीतर दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।

भूकंप विज्ञान क्या है?

विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत भूकंप का अध्ययन किया जाता है, भूकंप विज्ञान (सिस्मोलॉजी) कहलाती है और भूकंप विज्ञान का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों को भूकंपविज्ञानी कहते हैं। अंग्रेजी शब्द ‘सिस्मोलॉजी’ में ‘सिस्मो’ उपसर्ग ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ भूकंप है। भूकंपविज्ञानी भूकंप के परिमाण को आधार मानकर उसकी व्यापकता को मापते हैं। भूकंप के परिमाण को मापने की अनेक विधियां हैं।

भूकंप क्यों आता है?

हमारी धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं, लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट दूसरी के नीचे आ जाती है।

भूकम्प की परिभाषा

भूकंप को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि पृथ्वी के भूपटल में उत्पन्न तनाव के आकस्मिक मुक्त होने से धरती की सतह के हिलने की घटना भूकंप कहलाती है। इस तनाव के कारण हल्का सा कंपन उत्पन्न होने पर पृथ्वी में व्यापक स्तर पर उथल-पुथल विस्तृत क्षेत्र में तबाही का कारण बन सकती है। जिस बिंदु पर भूकंप उत्पन्न होता है उसे भूकंपी केंद्रबिंदु और उसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र अथवा अंत: केंद्र के नाम से जाना जाता है। अधिकेंद्र की स्थिति को उस स्थान के अक्षांशों और देशांतरों के द्वारा व्यक्त किया जाता है।

कैसे मापा जाता है?

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन 1935 में कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।

इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुणा बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह प्रति स्केल 32 गुणा बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुणा बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

रिक्टर पैमाने पर तीव्रता प्रभाव

  • 0 से 1.9 सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
  • 2 से 2.9 हल्का कंपन।
  • 3 से 3.9 कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा अहसास
  • 4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकते हैं।
  • 5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है।
  • 6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
  • 7 से 7.9 इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
  • 8 से 8.9 इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं।

 

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