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    टीकाकरण नीति : आखिर केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों कहा- न्यायिक हस्तक्षेप की नहीं जरूरत?

    Supreme Court
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    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। टीकाकरण नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने अपना बचाव किया है। केन्द्र सरकार ने वैक्सिनेशन की ताजा रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दी है। रविवार सायं केन्द्र सरकार ने अपने हल्फनामे में कोर्ट के सभी सवालों के जवाब दिए हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हल्फनामें कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

    केन्द्र ने कहा कि देश भर में कोई भी कोविड मरीज कहीं भी हस्पताल में दाखिल हो सकता है। मतलब आरटीपीसीआर रिपोर्ट या आधार कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी। केन्द्र ने अपने हल्फनामें में यह भी कहा कि 18 से 44 साल के लोगों को वैक्सीन लगवाने की मंजूरी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि कई राज्य इसकी मांग कर रहे थे और केन्द्र सरकार ने वैक्सीन उत्पादकों से राज्यों को एक कमीत पर वैक्सीन सप्लाई करने का कहा गया है।

    क्या है पूरा मामला

    गौरतलब हैं कि केन्द्र सरकार को वेकसीन की एक खुराक के लिए 150 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं तो वहीं वैक्सीन निर्माता कंपनियां राज्यों से इसके लिए 300 और 400 रुपये प्रति डोज ले रही हैं। सरकार ने कहा कि उसे वैक्सीन की कीमत इसलिए कम चुकानी पड़ रही है क्योंकि उसने बड़ी मात्रा में टीके का आॅर्डर दिया गया है।

     

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