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Tuesday, April 14, 2026
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    हरियाणा ने जीता स्कॉच गोल्ड अवार्ड, दिल्ली में मिला सम्मान

    कृषि एवं किसान कल्याण और बागवानी विभाग की उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए मिला पुरस्कार

    चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा द्वारा कृषि और बागवानी क्षेत्र में हासिल की गई उल्लेखनीय उपलब्धियों को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। दोनों विभागों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड और फसल क्लस्टर विकास कार्यक्रम में अपनी-अपनी उपलब्धियों के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड मिला है। उक्त जानकारी देते हुए सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह अवार्ड हरियाणा की ओर से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा एवं बागवानी विभाग के महानिदेशक अर्जुन सैनी ने नई दिल्ली में प्राप्त किया।

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    उन्होंने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल के मार्गदर्शन में हरियाणा निरंतर कृषि और बागवानी क्षेत्र में नए-नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रदेश सरकार विविधीकरण के माध्यम से किसानों के लाभ और आय को बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रही है।

    बागवानी व कृषि-व्यवसाय को बढ़ाने में हरियाणा ने की पहल

    प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय पूल में खाद्यान्न का दूसरा सबसे बड़ा योगदान देने वाले हरियाणा प्रदेश ने बागवानी की दिशा में विविधीकरण और कृ षि-व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल की हैं। हरियाणा ने लगभग 400 बागवानी फसल समूहों की मैपिंग की है और 700 किसान उत्पादक संगठनों का गठन किया है। उन्होंने बताया कि क्लस्टर में बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज को मजबूत करने के लिए राज्य ने एफपीओ के माध्यम से आॅन-फार्म इंटीग्रेटेड पैक-हाउस की स्थापना के लिए 510.35 करोड रुपये के परिव्यय के साथ एक महत्वाकांक्षी योजना – ‘फसल क्लस्टर विकास कार्यक्रम (सीसीडीपी)‘शुरू की है। प्रदेश में अब तक 33 एकीकृत पैक-हाउस स्थापित किए जा चुके हैं और 35 प्रगति पर हैं।

    हरियाणा में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

    प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा राज्य में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का एक विस्तृत नेटवर्क है जहां किसानों की मिट्टी परीक्षण के लिए आसान पहुंच है। 20-25 किलोमीटर की परिधि में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की उपलब्धता है। 2020-21 से पहले विभाग 35 स्थैतिक मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं, जो सालाना 7.4 लाख मिट्टी के नमूनों का परीक्षण कर सकती थीं। वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान विभाग ने 60 नए एसटीएल, अब विभाग के पास कुल 95 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं जो सालाना 30 लाख मिट्टी के नमूनों का परीक्षण कर सकती हैं।

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