
किताबों से आगे बढ़कर प्रयोग, हर छात्र के लिए प्रैक्टिकल नोटबुक जरूरी
सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। जिला शिक्षा विभाग ने लैब आधारित हैंड्स-ऑन शिक्षण को अनिवार्य करते हुए नए निर्देश जारी किए हैं, जिनमें कक्षा 6वीं से 12वीं तक प्रयोग, प्रोजेक्ट और गतिविधियों के जरिए पढ़ाई पर जोर दिया गया है। विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी विद्यालय प्रमुखों के माध्यम से इन दिशा-निर्देशोें का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। नए आदेशों के तहत विज्ञान शिक्षण को पूरी तरह प्रयोगात्मक और गतिविधि आधारित बनाया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि और समझ दोनों बढ़ सके। Govt School News
जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक अब विज्ञान अध्यापक नियमित रूप से लैब में विद्यार्थियों से प्रयोग, मॉडल निर्माण, प्रोजेक्ट व नवाचार गतिविधियां करवाएंगे। इन सभी कार्यों का रिकॉर्ड लॉग बुक में दर्ज करना अनिवार्य होगा, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। स्कूलों में उपलब्ध विज्ञान और गणित किट्स के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया गया है। विभाग ने साफ किया है कि कोई भी उपकरण अनुपयोगी या सीलबंद नहीं रहना चाहिए। निरीक्षण के दौरान लापरवाही मिलने पर संबंधित शिक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। वहीं स्कूल प्रमुखों को प्रयोगशालाओं में बिजली, स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त रोशनी, फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड और वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिल सके।
प्रयोग और गतिविधियों से मजबूत होगी विज्ञान शिक्षा | Govt School News
कक्षा 9वीं से 12वीं तक की विज्ञान कक्षाएं यथासंभव प्रयोगशालाओं में संचालित की जाएंगी और पूरा प्रैक्टिकल पाठ्यक्रम वहीं पूरा कराया जाएगा। वहीं कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को साइंस किट के माध्यम से गतिविधि-आधारित शिक्षा दी जाएगी। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रैक्टिकल नोटबुक अनिवार्य होगी और उसका नियमित मूल्यांकन भी किया जाएगा। सप्ताह में दो दिन प्रार्थना सभा के दौरान छोटे-छोटे प्रयोग, उपकरणों का प्रदर्शन और रोचक गतिविधियां करवाई जाएगी। इसके अलावा आनंदमय शनिवार के तहत विज्ञान क्विज, मॉडल प्रतियोगिता और नवाचार गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। विभाग ने इंस्पायर अवार्ड, विज्ञान संगोष्ठी, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, पृथ्वी विज्ञान ओलंपियाड, बुनियाद और सुपर-100 जैसे कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा है।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि हमारा लक्ष्य केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार की भावना को विकसित करना है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें। जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता साईं ने कहा कि इन नवाचारपूर्ण कदमों से विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं, बल्कि व्यवहारिक और प्रायोगिक अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी वैज्ञानिक सोच सशक्त होगी और नवाचार की नई संभावनाएं विकसित होंगी। Govt School News














