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Thursday, April 16, 2026
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    ईरान ने परमाणु हथियार की मंशा से किया इनकार, आरोपों को बताया ‘बड़ा झूठ’

    Tehran
    Tehran ईरान ने परमाणु हथियार की मंशा से किया इनकार, आरोपों को बताया 'बड़ा झूठ'

    तेहरान (एजेंसी)। ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किये जा रहे दावों को ‘झूठा आरोप’ करार देते हुए कहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोई मंशा नहीं रखता है। वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ईरान के स्थायी मिशन ने कहा कि यह आरोप निराधार हैं और बार-बार दोहराने से सत्य नहीं बन जाते। मिशन ने जोर दिया कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार बनाने, विकसित करने या हासिल करने का प्रयास नहीं किया है। मिशन ने “ईरान के पुन:-पुष्टिकरण” पर जोर देते हुए कहा कि “वह किसी भी परिस्थिति में कभी भी कोई परमाणु हथियार न तो हासिल करने की कोशिश करेगा, न ही उन्हें विकसित करेगा और न ही उन्हें प्राप्त करेगा।” मिशन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस बात का स्वागत किया है और आईएईए ने इसकी लगातार पुष्टि की है।

    मिशन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की विस्तृत जांच हुई है और किसी भी प्रकार के परमाणु सामग्री के दुरुपयोग का प्रमाण नहीं मिला है। ईरान ने यह भी कहा कि वह परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के प्रति प्रतिबद्ध है और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग का उसका अधिकार “अविभाज्य ” है। मिशन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दावा तो उनके अपने देश की खुफिया एजेंसियों के आकलन के भी विपरीत है।”

    मिशन ने इजरायली अधिकारियों के उन लंबे समय से चले आ रहे दावों को भी खारिज कर दिया कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से केवल “कुछ ही हफ़्ते दूर” है। मिशन ने कहा, “यह ‘बड़ा झूठ’ कि ईरान परमाणु हथियार बनाने से केवल कुछ ही हफ़्ते दूर है, नेतन्याहू ने यह झूठ लगभग 1790 हफ़्तों (34 साल से भी ज्यादा समय) तक दोहराया है। यह झूठ उस सच्चाई को नहीं बदल पाया है कि असल में ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार का रास्ता नहीं चुना, बल्कि उसने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के अपने अटूट अधिकारों पर ही जोर दिया।”

    उल्लेखनीय है कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को वर्षों से राजनीतिक दबाव और पश्चिमी आरोपों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2015 में “संभावित सैन्य आयाम” फाइल के बंद होने के बाद, ईरान ने ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना’ के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को तब तक पूरा किया, जब तक कि 2018 में अमेरिका इस समझौते से पीछे नहीं हट गया और यूरोप अपनी जिÞम्मेदारियों को निभाने में विफल नहीं रहा। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यूरेनियम संवर्धन का अधिकार ईरान के लिए निर्विवाद है, हालांकि संवर्धन का स्तर बातचीत के जरिए तय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी प्रकार का दबाव या युद्ध के जरिए रोक लगाना स्वीकार्य नहीं होगा। ईरान ने कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिबंधों में राहत और पारदर्शी समझौते के जरिए ही दीर्घकालिक समाधान संभव है।