हमसे जुड़े

Follow us

33.4 C
Chandigarh
Thursday, April 16, 2026
More
    Home देश प्रकृति के का...

    प्रकृति के कानून को तोड़ना कहां तक उचित?

    Nature’s Rule

    बुद्धिजीवी बोले, समलैंगिकता अपराध, आईपीसी की धारा 377 सही |nature’s rule

    सच कहूँ-देवीलाल बारना

    कुरुक्षेत्र। हिंदुस्तान जैसे देश में आमजन समलैंगिकता जैसे शब्दों को सुनना तक पसंद नहीं करता।(nature’s rule) हालांकि समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा 377 भी लगाई है।

    लेकिन वहीं देश के अंदर ही कुछ लोग ऐसे हैं जो इस धारा को खत्म करवाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को मानना है कि भारत की अपराध संहिता की धारा 377 उनकी यौन प्राथमिकताओं की सुरक्षा को नजर अंदाज कर मौलिक अधिकारों का हनन करती है। बता दें कि इस धारा के तहत पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक संबंध पर रोक है और इसके लिए 10 साल की कैद की सजा हो सकती है।

    यह भी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ आईपीसी की धारा-377 को खत्म करने के लिए कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। इस बारे में जब कुछ बुद्धिजीवी लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने इस प्रकार से अपने विचार व्यक्त किए।

    समलैंगिकता को सही ठहराना गलत, कोर्ट दे सख्त सजा | nature’s rule

    प्रकृति द्वारा बनाए गए नियमों को तोड़ना कहां तक उचित माना जा सकता है। वेदों में भी कहा गया है कि समलैंगिकता अपराध है। वहीं एक तरफ सामाजिक संस्थाएं लोगों को जागरूक कर रही तो कुछ लोग ऐसे भी जो इसे सही ठहराने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही है। यदि समाज में समलैंगिकता को बढ़ावा मिलता है तो आने वाले समय में संपूर्ण मानव जाति को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

    महेंद्र पाल शर्मा, उपाध्यक्ष, उमंग समाजसेवी संस्था।

    ऐसे लोगों को समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता |nature’s rule

    बेशक कई देशों में समलैंगिक शादी से जुड़े नए-नए कानून बन गए हों लेकिन समाज इस प्रकार के लोगों को कभी स्वीकार नहीं कर सकता। भारत में इस तरह के समाज को कभी मान्यता दी ही नहीं जा सकती।

    एनडी गुप्ता, राजनैतिक सलाहकार (सांसद राजकुमार सैनी)।

    संसार की रचना में रूकावट बन सकती है समलैंगिता |nature’s rule

    समलैंगिकता से सबसे पहला असर हमारे वजूद को पड़ेगा। प्रकृति द्वारा बनाए गए कानून को आज इंसान तोड़ने की कोशिश कर रहा है। ऐसे लोगों को हाई कोर्ट द्वारा सख्त सजा दी जानी चाहिए। समलैंगिता संसार की रचना में रूकावट बन सकती है। इसलिए आईपीसी की धारा 377 को ज्यों का त्यों लागू रखा जाए।

    रामकुमार रंबा, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा पिछड़ा वर्ग महासभा।

    आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा बुरा असर |nature’s rule

    अगर समलैंगिक लोगों की आबादी बढ़ेगी तो आने वाले समय में पीढ़ियों पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा क्योंकि बच्चे जो देखेंगे वहीं करेंगे। यह बात तो हमारे शास्त्र भी बताते हैं कि समलैंगिकता हमारे शरीर के लिए सही नहीं है। ऐसा व्यक्ति बीमारियों का घर बन जाता है। बताया जाता है कि समलैंगिक लोग किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त होते हैं।

    भारत भूषण, वरिष्ठ समाजेसवी कुरुक्षेत्र।

    अनैतिक काम है समलैंगिकता |nature’s rule

    समलैंगिकता अनैतिक कार्य है। इस प्रकार के कार्य समाज को विनाश की ओर ले जाते हैं। माता-पिता ही एक बच्चे का संपूर्ण विकास कर सकते हैं जबकि समलैंगिक कपल ऐसा नहीं कर पाएंगे। बहुत सी बातें ऐसी होती हंै जो माँ सिखाती हैं तो कुछ पिता लेकिन समलैंगिक इन नियमों का उल्लंघन कर कर क्या सिखाएंगे?

    रामेश्वसर सैनी, प्रदेशाध्यक्ष,सर्व समाज कल्याण सेवा समिति।

    Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।