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Friday, January 23, 2026
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    रैलियों की भीड़ पोलिंग बूथ से गायब

    polling-booth

    चुनाव रैलियों में भीड़ उमड़ रही है, परंतु पोलिंग बूथों पर मतदाताओं में सुस्ती है, अभी तक लोकसभा चुनाव के तीन चरण पूरे हो चुके हैं लेकिन वोटिंग 60.62 प्रतिशत के आसपास ही घूम रहा है, जबकि चुनाव आयोग के प्रचार अभियान को यदि देखा जाए तब यह 80 प्रतिशत तक अवश्य पहुंच जाना चाहिए था। चुनावी रैलियों की भीड़ व चुनावी प्रतिशत साफ जाहिर करते हैं कि भीड़ पैसे व उपहार के लालच में रैलियों की रौणक बन रही है।

    वाराणसी जिस पर पूरे देश की नजर है वहां से शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना नामांकन भरा तब वहां लाखों की संख्या में लोग जुटे तो उन पर कांगे्रस के नेता अजय राय ने आरोप लगाया है कि वे पैसे देकर इक्ट्ठे किए गए लोग हैं। दो-तीन रोज पूर्व भाजपा के कार्यालय के बाहर लोगों ने हुड़दंग मचाया और धरना दिया था कि उन्हें रैली में जाने के बाद भुगतान नहीं हुआ है, उनके पैसे दिए जाएं नहीं तो वह अपना धरना नहीं उठाएंगे। पहले के चुनावों में भी नेताओं द्वारा रैलियों में उपहार व पैसे बांटने को लेकर फैली भगदड़ एवं उससे लोगों के मारे जाने की खबरें अक्सर सुर्खियां बनी हैं।

    यहां इस प्रचलन को देखकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आमजन ही अपना मत बेचने की जुगत भिड़ाता रहता है तब भ्रष्टाचार को मिटाने का शोर क्यों? अफसोस मतदाता उन नेताओं की रैली में कोई बात सुनने नहीं जाता है, जहां नेता झूठ बोलते हैं, जनता को मूर्ख बनाया जाता है और बहुत ही थोड़े से रूपयों के लालच में उससे वोट हथिया लिया जाता है, तब भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति, सरकार व प्रशासन की उम्मीद फिर क्यों की जा रही है। रैलियों की भीड़, वोट बेच रहे मतदाताओं से एक बात साफ हो गई है कि बेरोजगारी व भ्रष्टाचार ने देशवासियों को सोचने-समझने की क्षमता को ही खत्म कर दिया है।

    अन्यथा ऐसा कैसे संभव है कि देश का वोटर उस भ्रष्टाचार को कैसे समर्थन दे जिससे निकलने की वह जींतोड़ कोशिशें कर रहा है, जिस भ्रष्टाचार की जकड़ उसे पैर-पैर पर महसूस हो रही है। चुनाव आयोग को प्रचार करना चाहिए कि अगर आपने छोटे-छोटे उपहारों व पैसों के लिए वोट दिया या वोट देने बूथ तक नहीं गए तब यह समझ लीजिए कि आपने भ्रष्टाचार को अगले पांच साल के लिए फिर से चुन लिया है। रैलियों में लोगों को चाहिए कि वह अपना भोजन व पानी साथ लेकर जाएं ताकि उम्मीदवारों को समझ आ जाए कि जो लोग उसका पानी भी नहीं पीना चाह रहे उसे झूठ बोलकर या पैसे देकर नहीं काम करके ही खुश करना होगा तभी देश का विकास होने लगेगा।

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