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Sunday, March 1, 2026
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    समाजसेवा की मिसाल। जरूरतमंदों की मदद के लिए मेरे दरवाजे हमेशा खुले: दर्शना

    Example of social service. My doors are always open to help the needy: Darshana

    सुखदुआ समाज की दर्शना महंत बन रही समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत

    • अब तक 111 गरीब लड़कियों की करवा चुकी है।
    • शादी, पूरा खर्च स्वंय करती है वहन।
    सच कहूँ/राजू ओढां। शादी हो या बच्चे का जन्म या घर में अन्य कोई खुशी का अवसर। ऐसे मेंं नाच-गाकर परिवार के लिए सुख-स्मृद्धि व खुशी की दुआ कर उसके बदले में बधाई के रूप में कुछ पैसे लेकर अपना जीवनयापन करने वाले सुखदुआ समाज की दर्शना महंत समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बन रही है। दर्शना के दरवाजे पर मदद के लिए आने वाला कोई भी व्यक्ति अब तक यहां से निराश लौटकर नहीं गया। दर्शना महंत अपनी उम्र में अब तक सैंकड़ों परिवारों को आपस में जोड़कर ये साबित कर रही है कि इन्सान दौलत से नहीं अपितु दिल से बड़ा होना चाहिए। अपने समाजसेवी कार्य के लिए सुखदुआ समाज की ये महंत दूर-दूर तक चर्चा का विषय बनी हुई है। वीरवार को दर्शना महंत ने 2 परिवारों को आपस में जोड़कर शादी संपन्न ही नहीं करवाई अपितु स्वंय कन्यादान करते हुए लड़की को अपने हाथों से डोली में बैठाकर रूख्सत किया। जी हां, हम बात कर रहे हैं ओढां मेंं रह रही सुखदुआ समाज से करीब 70 वर्षीय दर्शना महंत की। दर्शना ने सच-कहूँ संवाददाता राजू ओढां से विशेष बातचीत करते हुए अपने समाजसेवी कार्य बारे विस्तृत जानकारी दी। दर्शना महंत ने बताया कि वह करीब 50 वर्ष पूर्व पंजाब से ओढां में सुखदुआ समाज की चंप्पा महंत के पास आई थी। पूरा कार्य उसे सौंपकर चंप्पा परलोक सिधार गई। दर्शना चंप्पा महंत को अपना गुरू मानती है।

    लड़की को अपने हाथों से डोली में करती है रूख्सत

    गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी करवाने में दर्शना को आत्मिक संतुष्टि मिलती है। विशेष बात ये है कि दर्शना शादियों का पूरा खर्च ही नहीं उठाती अपितु लड़की का अपने हाथों से कन्यादान करते हुए अपने घर से ही डोली में रूख्सत करती है। दर्शना अब तक 110 गरीब लड़कियों की शादी करवा चुकी है। वीरवार को महंत के घर से 111वीं लड़की की डोली उठी। दर्शना ने बताया कि काफी वर्ष पूर्व वह गांव बीरूवाला में बधाई मांगने गई थी। इस दौरान एक महिला ने उसे 8 बेटियां होने बारे बताया। जिसके बाद उसने महिला को आश्वस्त किया कि अगर उसकी आगामी औलाद बेटी हुई तो वह उसे अपनी बेटी बनाकर उसकी शादी का पूरा खर्च स्वयं वहन करे उसे अपने घर से ही विदा करेगी। वीरवार को दर्शना ने लड़की की डोली अपने घर से ही विदा की। दर्शना ने इस शादी को पूरे रस्मों-रिवाज से संपन्न करवाकर शादी का पूरा घरेलू सामान भी दिया।

    मदद मांगने वाला नहीं लौटता खाली

    दर्शना महंत के दरवाजे पर मदद मांगने वाला कोई भी व्यक्ति अभी तक खाली नहीं लौटा। लड़कियों की शादी करवाने की बात हो या किसी अन्य तरह की कोई मदद। दर्शना हर समय तैयार रहती है। दर्शना ने बताया कि उसके पास पिछले करीब 25 वर्षां से रजनी महंत रह रही है। वे लोग जब भी किसी के यहां बधाई लेने जाते हैं तो किसी के साथ किसी तरह की कोई धक्केशाही नहीं करते। दर्शना अब तक अनेक लोगों की मदद कर चुकी है। दर्शना ने बताया कि इस जीवन का कोई भरोसा नहीं कब हाथ से निकल जाए। इसलिए जीते-जी जितनी नेकी हो सकती है वो करना चाहती है। दर्शना रजनी महंत को भी यही शिक्षा देती है कि नेकी का दामन कभी नहीं छोड़ना।

    बेटियां बंटाती है दु:ख: दर्शना

    दर्शना ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का भी शानदार संदेश दिया। उसने कहा कि इस पुरूष प्रधान समाज मेंं बेटियों को बेटों के समान दर्जा नहीं दिया जाता। लेकिन बेटियां बेटों से किसी क्षेत्र में कम नहीं है। पुत्र-कूपुत्र हो सकता है लेकिन बेटी कू बेटी कभी नहीं हो सकती। बेटी पराए घर जाने के बाद भी अपने मां-बाप की हमेशा फिक्र करती है। दर्शना ने अपील करते हुए कहा कि बेटियों को गर्भ में कभी न मरवाकर उन्हें दुनिया में आने का अवसर देना चाहिए। बेटियों को अगर बेटों सी परवरिश दी जाए तो वे भी माता-पिता, समाज व देश का नाम रोशन कर सकती है।

    पूज्य गुरू जी ने दिया था सुखदुआ समाज का नाम

    नाच-गाकर गलियों में घूमने वाले इन लोगों को किन्नर व हिजड़े या अन्य नामों से पुकारकर उन्हें तिरस्कृ त किया जाता था। जिसके बाद पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने इस समाज की सुध लेते हुए उन्हें सुखदुआ समाज का नया नाम दिया। क्योंकि उक्त लोग लोगों के लिए सुख की दुआ करते हैं। इस नाम के बाद इस समाज के लोगों को एक नई पहचान ही नहीं मिली बल्कि उनका सम्मान भी बढ़ा। अब इन लोगों को समाज में सुखदुआ समाज के नाम से जाना जाता है।
    ‘‘मुझे गरीब बेटियों की शादी करवाकर आत्मिक संतुष्टि मिलती है। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने हमारे समाज को सुखदुआ समाज का नाम देकर हमारा सम्मान बढ़ाया है। इस नए नाम के बाद लोगोंं की हमारे प्रति धारणा में बदलाव आया है और हमें समाज में सम्मान मिला है। हम पूज्य गुरू जी के आभारी हैं।

    दर्शना महंत

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