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Sunday, February 1, 2026
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    Delhi : केंद्र-राज्य में तालमेल

    Delhi
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल

    देश में केंद्र व राज्य सरकारों में अधिकारों को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। ताजा मामला केंद्र शासित राज्य (Delhi) का हे, जहां दिल्ली सरकार व केंद्र सरकार में अधिकारों को लेकर खींचतान जारी है। मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने उप-राज्यपाल की शक्तियों को सीमित करते हुए चुनी हुई सरकार को अधिकार सौंपे दिए थे। साथ ही, दिल्ली हाईकोर्ट के पांच साल पुराने फैसले को पलटते हुए दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और उसे नौकरशाही पर नियंत्रण का अधिकार भी दिया था। अब केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पलट दिया है। यह मामला राजनैतिक स्तर पर तूल पकड़ चुका है।

    विपक्षी दलों को एकजुटता का एक और मौका मिल गया है। (Delhi) वास्तव में देश में संघीय ढांचे की व्यवस्था है। केंद्र के साथ-साथ राज्यों को भी कानून बनाने के अधिकार दिए गए हैं, लेकिन यह भी तय है कि पूर्ण राज्य व केंद्र अधीन राज्यों के अधिकारों में कुछ अंतर भी है। यह मामला केवल उन्हीं केंद्र प्रशस्त राज्यों का है, जहां विधानसभा का भी प्रावधान है। दूसरी तरफ जब सरकारें अलग-अलग दलों की हों, तब भी केंद्र व पूर्ण राज्यों में भी टकराव होता रहा है। देश में चुनावी राजनीति हावी होने के चलते राजनीतिक निर्णय टकराव का कारण बनते हैं, विशेष तौर पर जब आम चुनाव या विधानसभा चुनाव नजदीक हों। यूं भी यह कहना गलत नहीं होगा कि केंद्र व राज्यों में तल्खियां कम हुई हैं। पहले अक्सर धारा 356 का प्रयोग चर्चा में रहता था।

    केंद्र सरकार द्वारा सैकड़ों बार धारा 356 का प्रयोग करते हुए राज्यों में (Delhi) विपक्षी दलों की सरकारें गिराई गर्इं। आपाताकल के दौरान 9 राज्यों की सरकारें भंग कर दी गई थी, फिर भी नई सरकार ने बदला लिया और विपक्षी पार्टियों से सत्ता छीनी। तल्खी भरे माहौल के कारण राजनीति में गिरावट आ रही है। सभी पक्षों को संवैधानिक प्रावधानों के तहत एक संतुलन और सार्थक विरोध को स्वीकार करने की भावना से कार्य करने की आवश्यकता है। साथ ही पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं की भाषा का स्तर को भी मर्यादित होना चाहिए। राज्यपालों व मुख्यमंत्रियों के बीच भी भाषा में संयम बरतने की कमी आ रही है। राज्यपाल या उप-राज्यपाल को चाहिए कि वे लोगों की चुनी हुई सरकार का मार्गदर्शन करें, टकराव पैदा होने पर समाधान भी करें। इस मामले को भी केंद्र व दिल्ली सरकार तालमेल स्थापित कर गंभीरता से निपटाएं।

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