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Thursday, April 16, 2026
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    प्रशांत किशोर के इस्तीफे के ऐलान के बाद कांग्रेस के नेताओं में घबराहट का माहौल

    Prasant-Kishore

    पश्चिम बंगाल के परिणामों पर टिका पंजाब कांग्रेस का भविष्य, ‘दीदी’ हारी तो संन्यास लेंगे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore)

    • भाजपा की जीत का पंजाब में दिखेगा असर, पंजाब में रोक देंगे काम

    सच कहूँ/अश्वनी चावला चंडीगढ़। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल बने हुए हैं। भाजपा जीत के लिए कोई कसर नहीं बाकी छोड़ रही। फिलहाल चुनावों के परिणामों के बाद ही सब साफ होगा कि कौन वहां सरकार बनाएगा, लेकिन यहां सबसे रोचक तथ्य यह है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति का पंजाब के आगामी चुनावों पर प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि पश्चिम बंगाल में यदि ‘दीदी’ की हार हुई तो प्रशांत किशोर राजनीति से संन्यास ले लेंगे। प्रशांत किशोर पंजाब के 2022 के होने वाले विधान सभा चुनावों में कांग्रेस के लिए बीच में ही काम छोड़ देंगे।

    • किशोर के इस निर्णय के बाद कांग्रेस पार्टी तैयारियों को लेकर असमंजस में पड़ गई है।
    • पार्टी ने तैयारियों की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशांत किशोर को सौंप रखी है।
    • कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने प्रशांत किशोर को अपना सलाहकार नियुक्त करते हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है।
    • इस कैबिनेट रैंक के आधार पर प्रशांत किशोर सरकारी कार्यों में दखल दे सकते हैं।

    किशोर का दावा: 100 से ज्यादा सीटें नहीं जीतेगी भाजपा

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री मंमता बनर्जी जिन्हें देश में दीदी के नाम से जाना जाता है।  उनकी चुनावी मुहिम को रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ही संभाला हुआ है।  वे पिछले दो वर्ष से उनके लिए काम कर रहे हैं। प्रशांत दीदी की पार्टी के लिए न केवल रणनीति तैयार कर रहे हैं, बल्कि जहां बदलाव चाहते हैं वहां भी दखल देकर बदलाव करते हैं। उनका दावा है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में 100 से कम सीटों तक सीमित रहेगी और ममता बैनर्जी ही पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनाएगी।

     100 से ज्यादा सीटें प्राप्त कर सत्ता में आई तो वह राजनीतिक दलों के लिए रणनीति बनाना ही छोड़ देंगे  (Prashant Kishore)

    प्रशांत किशोर के इस दावे को लेकर जब बार-बार सवाल उठ रहे थे, तब गत दिवस प्रशांत किशोर ने खुद ऐलान कर दिया कि यदि पश्चिम बंगाल में भाजपा उनके ऐलान के उलट 100 से ज्यादा सीटें प्राप्त कर सत्ता में आई तो वह राजनीतिक दलों के लिए रणनीति बनाना ही छोड़ देंगे। पश्चिम बंगाल के परिणाम उलट आए तो वह अपने इस काम से संन्यास लेते हुए कोई ओर काम शुरू कर लेंगे।

    2 मई पर टिकी सबकी निगाहें

    पश्चिम बंगाल के संदर्भ में प्रशांत किशोर का यह ऐलान पंजाब कांग्रेस की राजनीति में प्रभाव दिखने लगा है, क्योंकि कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का जिम्मा उन्हें सौंप रखा है। ऐसे में यदि दीदी पश्चिम बंगाल में हार जाती है तो वे अपने ऐलान अनुसार वे काम बीच में ही छोड़ देंगे। इस ऐलान के बाद कांग्रेसी नेताओं में चर्चाओं का दौर छिड़ गया है और भीतरघात से वे घबराए भी हुए हैं।

    • ऐसे में पंजाब कांग्रेस को अपने स्तर पर ही चुनावों की तैयारी करनी पड़ सकती है।
    • अब सभी की निगाहें दो मई के पश्चिम बंगाल के परिणामों पर टिकी है।

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