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    युद्ध की तबाही

    युद्ध मनुष्य की सदियों की मेहनत पर पल भर में बर्बाद कर देता है। रुस-यूक्रेन युद्ध पर आधारित ताजा आंकड़ें भयभीत करने वाले हैं। विभिन्न मीडिया वेबसाइट्स के अनुसार रूस ने यूक्रेन के एक डैम पर हमला कर दिया है, जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। बात केवल बाढ़ की नहीं बल्कि बिजली, कृषि व पीने योग्य पानी जैसी कई समस्याएं पैदा होने की है। यह भी कहा जा रहा है कि यूक्रेन ने भी रूस के एक पुल पर हमला किया था, जिसका रूस ने बदला लिया है।

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    दोनों देश एक दूसरे पर हमलों को आतंकी हमले बता रहे हैं। इन आरोपों में वास्तविक्ता क्या है यह तो समय ही बताएगा, लेकिन जिस प्रकार की तस्वीरें सामने आ रहीं हैं, जिससे मनुष्य की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। रूस-यूक्रेन के किसी भी पक्ष ने युद्ध रोकने की कवायद नहीं की। इस युद्ध में भले ही रूस की भूमिका प्रभावी है, यूक्रेन का नुक्सान ज्यादा हो रहा है, इसके बावजूद यूक्रेन पीछे हटने को तैयार नहीं और न ही युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई अपील कर रहा। डैम पर हुए हमले के बावजूद यूक्रेन ने ऐलान कर दिया है कि वे झुकने वाले नहीं।

    वास्तव में अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई विकसित देश यूक्रेन की पीठ थपथपा रहे हैं और युद्ध के लिए आर्थिक मदद दे रहे हैं। अमेरिका व उसके समर्थक देश दोगली नीति अपना रहे हैं। एक तरफ अमेरिका विश्व में शांति और मानवीय अधिकारों का हितैषी देश माना जाता है लेकिन रूस यूक्रेन युद्ध में अमेरिका शांति स्थापित करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं करता दिख रहा।

    सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि शांति स्थापित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की सर्वश्रेष्ठ संस्था सुरक्षा परिषद् के सदस्य देश होने के बावजूद अमेरिका युद्ध को समाप्त नहीं करने दे रहा। इस युद्ध में किसकी जीत होगी फिलहाल यह कहना मुश्किल है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने वाली संस्थाओं की भूमिका शर्मनाक रही है और इनकी कार्यशैली और नीतियों पर सवाल उठाना स्वाभाविक है। साथ ही विकसित देशों की प्रतिष्ठा व भूमिका धुमिल हुई है। भले ही यूक्रेन पुल गिराए, भले ही रूस, अन्तत: क्षति तो मनुष्य की मेहनत की ही होगी।

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