‘‘बेटा, लड़की को पढ़ाओ, लड़की भी पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।’’

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मेरे घर सबसे पहले लड़की ने जन्म लिया। उसके बाद दस वर्ष तक कोई संतान नहीं हुई। इस पर हमारे रिश्तेदारों ने हमें ताने मारने शुरू कर दिए कि तुमने तो डेरा सच्चा सौदा, सरसा वाले संत जी से नाम ले रखा है, तुम्हारे लड़का क्यों नहीं हुआ? लेकिन मुझे अपने अपने सतगुरू पर पूरा यकीन था कि वे अवश्य ही मेरी मुराद पूरी करेंगे। एक दिन हम पूजनीय परम पिता जी को मिलने आश्रम में पहुंचे। पूजनीय परम पिता जी सुबह की मजलिस में नीम के पास सुसज्जित चौकी पर विराजमान थे।

तब हमनें पूजनीय परम पिता जी प्रार्थना की कि पिता जी, हमारे घर एक लड़की ही है, लड़का नहीं है, दया-मेहर करो जी। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘बेटा, लड़की को पढ़ाओ, लड़की भी पढ़-लिखकर माता-पिता का नाम रोशन कर सकती है।’’ जो दात मालिक ने देनी है वो देनी ही है। उसे कोई नहीं रोक सकता। इस प्रकार के पावन वचन सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि पूजनीय परम पिता जी ने हमारी अरदास मंजूर कर ली है। पूजनीय परम पिता जी के पावन वचनों के अनुसार मेरे घर सन् 1980 में लड़के ने जन्म लिया।
श्री चरण सिंह, डूल्ट, फतेहाबाद (हरियाणा)

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