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    सस्ती जमीन लेने वाले गुरुग्राम के अस्पतालों को अब गरीबों का उपचार भी करना होगा सस्ता या फ्री

    15000 रुपये तक मासिक आय वाले परिवारों को मिलेगा नई पॉलिसी का लाभ

    • गुरुग्राम के फोर्टिस, मेदांता, आर्टेमिस अस्पताल हैं पालिसी के दायरे में

    गुरुग्राम। (संजय कुमार मेहरा) गरीब परिवारों को यह राहत देने वाली खबर है कि अब उनका गुरुग्राम के प्राइवेट अस्पतालों में फ्री या रियायती दरों में उपचार होगा। सरकार द्वारा पहले से बनाई गई पॉलिसी में संशोधन करते हुए अस्पतालों को नई पॉलिसी की पालना अनिवार्य कर दी है। ये वे प्राइवेट अस्पताल हैं, जिन्हें हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से रियायती दरों पर जमीन मिली हुई है।

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    अब से पहले इस पॉलिसी को कड़ाई से लागू भी नहीं किया जा रहा था। ऐसे में हरियाणा सरकार ने ना केवल पॉलिसी में संशोधन किया है, बल्कि उसकी पालना के लिए अस्पतालों को बाध्य भी किया जाएगा। नई पॉलिसी के अंतर्गत गुरुग्राम के 3 बड़े नामी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आर्टेमिस, फोर्टिस तथा मेदांता द मेडिसिटी भी आते हैं। नई पॉलिसी को लागू करने को लेकर गुरुग्राम के उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने इन तीनों अस्पतालों के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित अधिकारियों की एक बैठक बुलाई। उन्हें इस पॉलिसी के बारे में अवगत करवाते हुए इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की राज्य सरकार की मंशा भी स्पष्ट कर दी है।

    उपायुक्त यादव ने बताया कि हरियाणा प्रदेश में एचएसवीपी से रियायती दरों पर जमीन लेकर बनाए गए प्राइवेट अस्पतालों को अब गरीब परिवारों को मुफ्त या बहुत ही रियायती दरों पर ईलाज की सुविधा देनी होगी। सभी स्रोतों से जिस परिवार की मासिक आय 15000 रुपये तक है, वे इस सुविधा का लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। गुरुग्राम में नियुक्त चीफ प्रोटोकोल ऑफिसर वत्सल वशिष्ठ को इस कार्य के लिए जिला में नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

    20 फीसदी बेड गरीबों के लिए आरक्षित
    मेदांता-द मेडिसिटी जैसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को अपनी कुल बेड की क्षमता के 20 फीसदी बेड गरीबों के लिए आरक्षित करने होंगे। इस श्रेणी में दाखिल हुए मरीज का यदि 5 लाख रुपये तक आता है तो उसका इलाज बिल्कुल फ्री होगा। यदि बिल की राशि 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच है तो मरीज से सामान्य चार्जिज का 10 प्रतिशत ही लिया जाएगा। यदि बिल की राशि 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो नॉर्मल चार्जिज का 30 प्रतिशत ही लिया जाएगा। इन अस्पतालों में ओपीडी में आने वाले मरीजों में भी 20 प्रतिशत सेवाएं समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए होनी चाहिए।

    गरीब परिवारों के लिए अलग से काउंटर बनाएं

    उपायुक्त ने प्राइवेट अस्पतालों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने अस्पताल में गरीब परिवारों अर्थात बीपीएल, ईडब्ल्यूएस परिवारों के लिए अलग से काउंटर बनाएं। जहां मरीज को दिखाना है वहां भी इनकी लाइन अलग हो, ताकि इन परिवारों से संबंधित मरीजों को अपना इलाज करवाने में कोई कठिनाई ना हो। यदि कोई बीपीएल मरीज उपलब्ध नहीं है तो गरीबों के लिए आरक्षित बेड पर सामान्य मरीज को दाखिल किया जा सकता है। जैसे ही बीपीएल या ईडब्ल्यूएस श्रेणी का कोई मरीज आएगा तो वह बेड खाली करवाना पड़ेगा। गरीबों के लिए अस्पताल में जेनेरिक दवाओं की भी व्यवस्था हो।

    मरीजों को अधिकारिक तौर पर किया जाएगा रेफर

    इस श्रेणी के अंतर्गत उपचार कराने के लिए मुख्यमंत्री हरियाणा, स्वास्थ्य मंत्री, सिविल सर्जन या जिला का नोडल अधिकारी, उपायुक्त एवं जिला रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष की स्वीकृति से जिला रेड क्रास सोसाइटी इन अस्पतालों को इलाज के लिए मरीज रेफर करेंगे। आयुष्मान भारत, चिरायु कार्ड तथा बीपीएल कार्ड धारक व्यक्ति सीधे भी अस्पताल में इलाज के लिए जा सकते हैं। आपात स्थिति में मरीज के इलाज को प्राथमिकता दी जाएगी और कागजी कार्यवाही बाद में की जाएगी। नई पॉलिसी की पालना के लिए एचएसवीपी द्वारा एक पोर्टल भी बनाया जा रहा है। पोर्टल बनने के बाद अस्पताल में बीपीएल या गरीब परिवार से संबंधित मरीज के दाखिल होते ही उसका विवरण पोर्टल पर अपलोड करना होगा। यहां तक कि मरीज को दिए गए फाइनल बिल की प्रति भी अस्पताल प्रबंधन को पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

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