क्यों नहीं लिया जा रहा सबक
महानगरों की सुंदरता की अपेक्षा सुरक्षा कहीं अहम मुद्दा है। मुआवजा देने के बाद मामले के समाधान पर चुप्पी साधने की औपचारिकताओं से अब तौबा हो और भयानक हादसों के होने पर सरकार संवेदनशीलता का प्रमाण दे व अपने कर्तव्यों को निभाए।
पंजाब की जेलों की दुर्दशा
रअसल किसी भी पार्टी ने राज्य की जेलों में सुरक्षा कानून लागू करने की गंभीर कोशिश नहीं की। पिछले कई सालों से जेलों में कैदियों से एक दिन में 5-7 मोबाइल फोन बरामद होने की घटनाएं आम घट रही हैं। फिरोजपुर, फरीदकोट व बठिंडा जेल हमेशा ही सुर्खियों में रही है। जेलों में नशा तस्करी के मामले भी आम हैं।
देशवासी अपने आपको मुर्गी न समझें, क्या समझें?
जिस देश में सरकार व बैंकर्स ने देश के ईमानदार करदाताओं व बचतकर्ताओं का मजाक बनाकर रख दिया हो तब उस देश में नागरिक अपने आपको एक मुर्गी से ज्यादा समझें भी तो क्या समझें? क्योंकि कभी कर्ज लेकर उद्योगपति भाग जाते हैं, कभी पूरा बैंक ही धराशायी हो जाता है।


























