देशवासी अपने आपको मुर्गी न समझें, क्या समझें?
जिस देश में सरकार व बैंकर्स ने देश के ईमानदार करदाताओं व बचतकर्ताओं का मजाक बनाकर रख दिया हो तब उस देश में नागरिक अपने आपको एक मुर्गी से ज्यादा समझें भी तो क्या समझें? क्योंकि कभी कर्ज लेकर उद्योगपति भाग जाते हैं, कभी पूरा बैंक ही धराशायी हो जाता है।
वनों को आग से बचाने के लिए बने ठोस नीति
वनों के बिना धरती दिवस मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। वनों की तबाही के होते विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बेहतर हो यदि अमीर देश व अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वनों को बचाने के लिए कोई ठोस मुहिम चलाएं, हर घटना पर चुप रहने से समस्या का निराकरण नहीं हो सकता।
आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की आवश्कता
यह दुरुस्त है कि केंद्र ने आटो-मोबाइल क्षेत्र में आर्थिक मंदी से उभरने के लिए कार्पोरेट टैक्स में कटौती की है
लेकिन बाजार में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही। सोने की कीमतों में उछाल निरंतर जारी है।
राजनीतिक द्वेष व संवैधानिक पद
राज्य सरकारें राज्यपाल की नियुक्ति को केंद्र सरकार की टेढ़े तरीके से राज्य में राजनीतिक दखलअंदाजी ही मानती है।
सरकार को राज्यपाल के पद की गरिमा को समझना चाहिए और कम से कम शिष्टाचार में तो कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए।
वृक्षों को बचाने की सैद्धांतिक जीत, व्यवहारिक हार
मुंबई के आरे में वृक्षों की कटाई रोकने के लिए पहले विद्यार्थियों को हाईकोर्ट जाना पड़ा
युवा पीढ़ी वातावरण को लेकर चिंतित है और उन्होंने साहस भी दिखाया

























