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Param Pita Shah Satnam Ji...
झील का चांद
तुम्हारा मन इस झील की तरह है। तम्हारे पास ज्ञान तो है लेकिन तुम उसका प्रयोग करने के बजाय सिर्फ उसे अपने मन में लेकर बैठे हो, ठीक उसी तरह जैसे झील असली चांद का प्रतिबिंब लेकर बैठी है।
परमात्मा की मर्जी
परमात्मा ने शरीर दिया है, बुद्धि दी है जिससे कि नेक कार्य कर दूसरों का हित किराया जाए।

























