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    चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं का शारीरिक और मानसिक तौर पर सशक्त रहना जरूरी: राजनाथ

    New Delhi
    New Delhi: चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं का शारीरिक और मानसिक तौर पर सशक्त रहना जरूरी: राजनाथ

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा है कि अनिश्चितता के दौर से गुजर रही दुनिया में देश के युवाओं का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त रहना तथा हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आॅपरेशन सिंदूर के दौरान देशभर में आयोजित मॉक ड्रिल्स में जन-जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले साहसी और समर्पित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों से प्रेरणा लेने का भी आह्वान किया। सिंह ने शनिवार को यहां दिल्ली छावनी में एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर में कैडेटों को संबोधित करते हुए एनसीसी को देश की ‘दूसरी रक्षा पंक्ति’ बताया, जिन्होंने आॅपरेशन सिंदूर में अपनी भूमिका असाधारण रूप से निभाई जब पूरा देश इस अभियान के दौरान अपनी सशस्त्र सेनाओं के साथ खड़ा था। New Delhi

    उन्होंने कहा, “भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट किया, जो पहलगाम में हुए दुर्भाग्यपूर्ण और कायराना आतंकी हमले का करारा जवाब था। हमारे सैनिकों ने साहस और संयम के साथ कार्रवाई की। हमने केवल उन्हीं को निशाना बनाया जिन्होंने हमें चोट पहुंचाई, किसी और को नहीं। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि हमारे सैनिक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत हैं।” रक्षा मंत्री ने युवाओं की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से की जो किसी भी प्रकार के चक्रव्यूह में प्रवेश करना और उससे विजयी होकर बाहर निकलना जानते हैं। उन्होंने युवाओं से सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हम ऐसे समय में प्रवेश कर चुके हैं जहां युवाओं से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। वे राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।”

    सिंह ने एनसीसी को युवाओं को सशक्त बनाने का एक उत्कृष्ट माध्यम बताया जो बदले में राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान देते हैं। उन्होंने कहा, “आज की दुनिया आराम बेच रही है। वीडियो गेम, फूड डिलीवरी और इस तरह की कई चीजें मानव जीवन में सुविधा लाने के लिए हैं। परेड, ड्रिल और शिविरों के माध्यम से एनसीसी आपको उस आरामदायक दायरे से बाहर निकालती है और मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। इसके अलावा, बच्चे कई जीवन कौशल सीखते हैं, जो आपदाओं के समय स्वयं और दूसरों की रक्षा करने में सहायक होते हैं।” रक्षा मंत्री ने कहा कि एनसीसी कैडेट में अनुशासन और देशभक्ति की भावना का संचार करती है तथा ‘एकाग्रता की कमी’ की समस्या को दूर करने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में, जब लोग सब कुछ तुरंत पाना चाहते हैं, एनसीसी धैर्य, निरंतरता और एकाग्रता सिखाती है, जो जीवन की बड़ी लड़ाइयों, राष्ट्र की महान जिम्मेदारियों और चरित्र निर्माण के लिए आवश्यक हैं। यह एकाग्रता उनके जीवन के हर पहलू में दिखाई देती है, चाहे वे सशस्त्र बलों में जाएँ या डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक, प्रशासक, राजनेता आदि बनें। New Delhi

    जीवन में केवल योजना-ए ही नहीं, बल्कि योजना-बी और आवश्यकता पड़ने पर योजना-सी बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा कि जब केवल योजना-ए होती है और वह काम नहीं करती, तो भय और निराशा पैदा होती है। लेकिन योजना-बी और योजना-सी होने से परिस्थितियां नियंत्रण में आ जाती हैं। उन्होंने कहा, “आपको हमेशा योजना-बी के लिए तैयार रहना चाहिए और यह याद रखना चाहिए कि यदि आज बारिश होती है, तो कल सूर्य अवश्य निकलेगा। जीवन में सफलता पाने के लिए ‘मेरा तरीका या कोई तरीका नहीं’ के बजाय ‘सैन्य सोच’ अपनानी चाहिए।”

    राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की भूमिका को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि एनसीसी से प्रशिक्षित अनेक लोगों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “परम वीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडे और कैप्टन विक्रम बत्रा एनसीसी कैडेट थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैं स्वयं भी एनसीसी कैडेट रहे हैं। अनेक अन्य लोग भी एनसीसी से निकलकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान एनसीसी कैडेट को दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में तैनात किया गया था। यह हर क्षेत्र में एनसीसी की महत्वपूर्ण भूमिका को दशार्ता है।”

    रक्षा मंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के प्रति देश के संकल्प को मजबूत करने की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, “संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा अन्य अधिकारों और कर्तव्यों को सुदृढ़ करने का माध्यम है। हमें वैसा नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जैसा हमारा संविधान चाहता है। हमें अपने संविधान को समझना चाहिए और उसमें निहित अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। इस पूरे अभियान में एनसीसी कैडेट ध्वजवाहक की भूमिका निभा सकते हैं।”

    कार्यक्रम के दौरान एक ‘अलंकरण समारोह’ का आयोजन किया गया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए कैडेट को रक्षा मंत्री पदक और प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए। इस वर्ष रक्षा मंत्री पदक जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख निदेशालय की कैडेट अर्पण दीप कौर तथा पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम निदेशालय के कैडेट पालदेन लेपचा को प्रदान किया गया। प्रशंसा पत्र कर्नाटक एवं गोवा निदेशालय की पेटी आॅफिसर लीशा देजप्पा सुवर्णा, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ निदेशालय के जूनियर अंडर आॅफिसर पवन भगेल, उत्तर पूर्व क्षेत्र निदेशालय की कॉर्पोरल राधा दोर्जी तथा उत्तराखंड निदेशालय के कैडेट प्रिंस सिंह राणा को प्रदान किए गए। रक्षा मंत्री ने एनसीसी के तीनों अंगों से आए कैडेट द्वारा प्रस्तुत प्रभावशाली ‘गार्ड आॅफ आॅनर’ का भी निरीक्षण किया। New Delhi

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