Karishma

अचानक बेपरवाह जी की दृष्टि उस कुत्ते पर पड़ी.... फरमाया ‘भाई! यह कोई बिछुड़ी हुई रूह आज चौरासी कटवाने आई है....

प्रेमी पृथ्वी राज इन्सां सुपुत्र सचखंडवासी प्रेमी फूल चंद जी, गांव धारनियां जिला फतेहाबाद से लिखते हैं कि यह दिसम्बर 1957 की बात है। उस दिन नेजिया खेड़ा गांव में बेपरवाह सार्इं मस्ताना जी महाराज का सत्संग था
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