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    गुरुग्राम: कादीपुर रैन बसेरे के पास अंधेरा, भीम नगर, भीमगढ़ खेड़ी में पड़ा है कूड़ा

    कई स्थानों पर रैन बसेरों में सुविधाओं का अभाव

    • रैन बसेरों में खामियों को लेकर भेजी शिकायत

    गुरुग्राम। (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा) शहर में नगर निगम द्वारा संचालित रैन बसेरों में बाकी सुविधाएं तो हैं, लेकिन कई तरह की खामियां भी हैं। पिछले दिनों डीसी द्वारा रैन बसेरों का दौरा करके सुधार के दिए गए निर्देशों के बाद भी स्थिति नहीं सुधारी गई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी की टीम ने इन खामियों की शिकायत सुप्रीम कोर्ट, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरुग्राम, जिला उपायुक्त गुरुग्राम से की गई है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी ने शहर के रैन बसेरों का बारीकी से निरीक्षण किया।

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    निरीक्षण टीम में शामिल कामरेड विनोद कुमार भारद्वाज व कामरेड राजेंद्र सिंह सरोहा ने निरीक्षण के बाद जानकारी सांझा करते हुए बताया कि कादीपुर गांव में करीब साढ़े 9 बजे रैन बसेरा ढूंढते हुए पहुंचे। इस रैन बसेरे के आसपास काफी अंधेरा नजर आया। गली में भी लाइट की व्यवस्था नहीं थी। रैन बसेरा मुख्य सड़क से काफी अंदर है, ऐसे में उनके बारे में हर किसी को पता नहीं चल सकता। दूसरी समस्या इस रैन बसेरे में पानी की समस्या है। वहां के बाथरूम तो चालू मिले, लेकिन वहां टूटियां, वॉश बेसिन में टुटियां टूटी हुई मिली।

    भीम नगर के हालात काफी खराब मिले

    भीम नगर के रैन बसेरे की हालत भी बेहतर नजर नहीं आई। वहां कमरा तो काफी बड़ा है, लेकिन वहां पर एक बड़े क्षेत्र में नगर निगम के पुराने रिकॉर्ड रखा गया है। उसमें सांप, बिच्छुओं का डर है। वहां का गार्ड भी शराब का सेवन किए हुए था। इस रैन बसेरे में मात्र 22 बिस्तर मिले, जबकि वहां पर 10 और बिस्तरों की जरूरत की जानकारी दी गई। क्योंकि लोग आते रहते हैं। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए मिले, जिनमें से रात के समय ठंड आती रहती है। वार्ड-10 में रेलवे स्टेशन स्टेशन के पास भीमगढ़ खेड़ी के रैन बसेरे के हालात तो बद से बदतर मिले। इस रैन बसेरे के बाहर व आसपास बहुत अधिक गंदगी पड़ी मिली। आसपास शौचालय की बदबू के कारण वातावरण बेहद ही खराब था। खाने, बाथरूम और पानी का कोई इंतजाम इस रैन बसेरे में नजर नहीं आया।

    सुखराली में पार्षद ने जगह देने से किया हुआ है मना

    सुखराली के सामुदायिक केंद्र के रैन बसेरे में भी वे पहुंचे। वहां पर लिखे गए सभी मोबाइल नंबर 9911540054 अजय, 9654000989 मोहित, 8700480493 यतिन, 9560465781 अरुण, 9773726101 अक्षय पर कॉल की गई, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। यतिन के नंबर से कॉल थोड़ी देर बाद आई। उन्होंने कहा कि करीब छह किलोमीटर दूर कन्हई गांव में जाएं। वहां के रैन बसेरे में बिस्तर मिलेंगे। यहां (सामुदायिक केंद्र सुखराली) में अंदर जगह नहीं मिलेगी। क्योंकि यहां के निगम पार्षद अनूप भाम्भु ने रैन बसेरे के लिए सामुदायिक केंद्र में जगह देने से मना कर दिया है।

    कई क्षेत्रों में नजर नहीं आए रैन बसेरे

    रात 12 बजे टीम के सदस्य कन्हई गांव में रैन बसेरे पर पहुंचे। वहां पर सुविधाएं नजर नहीं आए। खिड़कियों के शीशे टूटे थे। बाथरूम में पानी का कोइ इंतजाम नहीं था। खाने का भी कोई प्रबंध नहीं था। ऐसे ही हालात सुभाष चौक होते हुए वाटिका बिल्डिंग के सामने, बादशाहपुर चौराहे के पास से दरबारीपुर के नए व पुराने रोड पर ढूंढने से भी रैन बसेरे नहीं मिले। जबकि नगर निगम की ओर से नेट पर इन स्थानों पर रैन बसेरे दर्शाए गए हैं।

    गाडिय़ा लोहारों को प्रवेश नहीं

    रात दो बजे के बाद टीम के सदस्य शहर में पुराने जेल कॉम्पलेक्स में बने रैन बसेरे में पहुंचे। वहां के आसपास गाडिय़ा लोहार महिलाएं, पुरुष और बच्चे खुले में ही सोते मिले। वहां के गार्ड से पूछने पर पता चला कि नगर निगम की ओर से उन्हें रैन बसेरे में आने से मना किया गया है। सेक्टर-15 पार्ट-2 में रैन बसेरे कहीं नजर नहीं आए। जबकि निगम के रिकॉर्ड में यहां रैन बसेरे दर्शाए गए हैं।

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