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Friday, February 6, 2026
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    कविता – माँ मैं फिर आऊंगा

    Kavita
    Kavita :

    Kavita: तेरे आँगन को, किलकारियों से फिर महकाऊँगा !
    तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा

    बेशक दुनिया से विदा हो चला, पर तेरे आस – पास सदा मैं रहूंगा,
    झेली हो छाती पर गोलियां कितनी, पर दर्द भरी कहानियाँ तुझसे न कहूंगा !
    मत रोना मेरी कब्र पर, किस्सा फिर कभी सुनाऊंगा।
    तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा

    तेरे हाथों की खुशबूदार रोटियां, मुझे अब भी लुभाती हैं
    खेतों की वो पगडंडियां, मुझे घर का पता बताती हैं ।
    सपने में तुझसे कभी, मीठी बातें करके चला जाऊंगा
    तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा

    तेरे अहसानों का कर्ज, कभी मैं भूल नहीं पाउँगा
    तेरे ममता के किस्से, माँ मैं स्वर्ग में भी सुनाऊंगा
    तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा

    तेरे हाथों का चूरमा जब, सरहद पे मैंने खाया था ,
    उसी ताकत से मैंने, आतंकी मार गिराया था ।
    बचपन की वो लोरियां, साथी फौजीयों को सुनाऊंगा
    तूं घबरा मत ! माँ मैं फिर आऊंगा

    माँ मैं मरा नहीं, कुछ पलों के लिए सो गया हूँ ,
    जिन्दा रहूँगा हर दिल में, मैं अमर हो गया हूँ।
    क्यों होते हैं फौजी शहीद, किस्सा ये फिर कभी सुनाऊंगा
    तूं घबरा मत माँ, मैं फिर आऊंगा ।।                                                                                                                                                                                                लेखक – कुलदीप स्वतंत्र

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