शिक्षा और रोजगार
खर्चे पर भी चर्चा करें मोदी : राहुल गांधी
नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छात्रों के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम पर तंज कसते हुए वीरवार को कहा कि आसमान छूते र्इंधन के दाम के बीच गाड़ी में तेल भरना भी किसी परीक्षा से कम नहीं है, इसलिए मोदी को लोगों की ढीली होती जेब को देखते हुए ‘खर्चा पे चर्चा’ करनी चाहिए। गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘केंद्र सरकार की टैक्स वसूली के कारण गाड़ी में तेल भराना किसी इम्तहान से कम नहीं, फिर प्रधानमंत्री इस पर चर्चा क्यूँ नहीं करते। खर्चा पे भी हो चर्चा।’
केंद्र सरकार की टैक्स वसूली के कारण गाड़ी में तेल भराना किसी इम्तहान से कम नहीं, फिर PM इस पर चर्चा क्यूँ नहीं करते?
खर्चा पे भी हो चर्चा! pic.twitter.com/jUJPERrp15
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 8, 2021
कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी महंगाई को लेकर सरकार पर हमला किया और कहा, ‘73 साल में सबसे महँगी और जालिम सरकार, हर रोज किसान पर करती नया वार। जो कभी नहीं हुआ, वो जुल्म कर दिखाया। मोदी सरकार ने 700 रुपये डीएपी खाद बढ़ाया, जिससे 1200 का 50 किलो का डीएपी 1900 रुपये के पार चला गया। मोदी जी पहले ही खेती की लागत 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ा चुके हैं। सब याद रखा जाभाएगा।
महंगाई बड़ी समस्या
भारत की बहुत सी आर्थिक समस्याओं में महंगाई की समस्या एक मुख्य है। वर्तमान समय में महंगाई की समस्या अत्यन्त विकराल रूप धारण कर चुकी है। एक दर से बढ़ने वाली महंगाई तो आम जनता किसी न किसी तरह से सह लेती है, लेकिन पेट्रोल, डीजल और खाद्यान्नों और उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों में भारी वृद्धि ने आमजन की कमर तोड़ दी है। वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि का क्रम इतना तीव्र है कि आप जब किर को दोबारा खरीदने जाते हैं, तो वस्तु का मूल्य पहले से अधिक हो चुका होता है । गरीब और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के मुख्य खाद्य पदार्थ गेहूँ के लगभग एक-तिहाई बढ़ोतरी इस समस्या के विकराल होने का संकेत दे रही है।
कारण
कालाधन, जमाखोरी, राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार, गरीबी, जनसंख्य अल्पविकास, राष्ट्रीयकृत उद्योगों में घाटा, सरकारी कुव्यवस्था, रुपये का अवमूल्यन, मुद्रास्फीति इत्यादि ऐसे कारक हें जो निरन्तर महंगाई को बढ़ाते जा रहे हैं।
समाधान
कीमतों में वृद्धि के कारणों का पता लगाकर उसे दूर करने के साथ-साथ आवश्यकता है संकल्प की और उसके लिए राष्ट्रीय संस्कार तथा संचेतना की। राष्ट्र के कर्णधार यदि अपने व्यक्तिगत और दलगत स्वार्थों से ऊपर उठकर विचार करें, तो देश अपने सभी विद्यमान तथा उपलब्ध साधनों के आधार पर राष्ट्र की प्रगति तथा सुख समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
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